
सीकर.
सीकर जिले में पिछले नौ दिनों में आठ छोटे बच्चे घर से लापता हो गए थे। जिनकी भनक इनके माता-पिता को भी नहीं लगी। गनीमत यह रही कि समय रहते यह बच्चे सुरक्षित हाथों में पहुंच गए। अन्यथा किसी बड़े हादसे का शिकार भी हो सकते थे। चाइल्ड लाइन के सीकर जिला समन्वयक सूर्य प्रकाश के अनुसार लावारिस मिले सभी बच्चों को वापस उनके घर तक पहुंचा दिया गया था। परिजनों को इनकी सही देखरेख की हिदायत दी गई थी।
खेल-खेल में निकले आगे
पांच मई को नवलगढ़ रोड, टैगौर स्कूल के पास पांच छोटे बच्चे लावारिस हालत में मिले। जो कि खेल-खेल में अपने घर से निकल आए और आगे जाकर रास्ता भटक गए थे। इन सब की उम्र भी तीन से पांच साल के बीच की थी। इसके बाद सूचना पर चाइल्ड लाइन की टीम पर पहुंची और बच्चों को घरवालों के सुपुर्द किया।
ट्रेन में चला गया दिल्ली
छह मई को रानोली क्षेत्र से एक 14 साल का बच्चा घर से निकल कर दिल्ली पहुंच गया था। इसके बाद दिल्ली में चाइल्ड लाइन के पदाधिकारियों ने यहां की टीम को सूचित कर बच्चे के बारे में जानकारी दी।
पानी-पुरी खाने चली आई चार किलोमीटर
आठ मई को हरदयालपुरा गांव में एक आठ साल की बच्ची बिना बताए घर से निकल पड़ी थी। घर से चार किलोमीटर दूर लावारिस हालत में मिली तो पूछने पर बताया वह पानी-पूरी खाने के लिए निकली थी।
अभिभावक जिम्मेदार
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बढ़ रही घटनाओं के पीछे बच्चों के माता-पिता ही जिम्मेदार हैं। समाज शास्त्री अरविंद सिंह महला का कहना है कि आर्थिक तंगी व महंगाई के कारण माता-पिता पैसे कमाने में व्यस्त हैं और अपने बच्चों को समय नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे में बच्चे को घर में अनौपचारिक माहौल मिलने के कारण वे भी कहीं दूर चले जाने की मंशा खातिर घर से निकल पड़ते हैं।
Published on:
15 May 2018 09:04 pm
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