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जारी होने के बाद भी दिवाली पर अटक गया इन कर्मचारियों का वेतन

सीकर. मंत्रालयिक कर्मचारियों की हड़ताल के बाद उपार्जित अवकाश स्वीकृत कर सरकार ने वेतन जारी करने के आदेश 31 अक्टूबर को कर दिए थे।
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जारी होने के बाद भी दिवाली पर अटक गया इन कर्मचारियों का वेतन


सीकर. मंत्रालयिक कर्मचारियों की हड़ताल के बाद उपार्जित अवकाश स्वीकृत कर सरकार ने वेतन जारी करने के आदेश 31 अक्टूबर को कर दिए थे। लेकिन कोषाधिकारियों में इन आदेशों को लेकर गलफत की स्थिति बनी हुई है। कोष अधिकारियों का तर्क है कि पांच अक्टूबर को हड़ताल खत्म हो गई थी। ऐसे में जो कर्मचारी चार व पांच अक्टूबर को कार्यालयों में लौट आए। उन कर्मचारियों का वेतन नहीं काटा जाएगा। इसके बाद कार्यालयों में आने वाले कर्मचारियों का पांच, छह व सात अक्टूबर का वेतन कटेगा।
आठ को आए थे ज्यादातर कर्मचारी
हड़ताल खत्म होने के दूसरे दिन शनिवार था। स्कूल, कॉलेज व सरकारी अस्पतालों को छोडकऱ अन्य सरकारी कार्यालयों में पांच दिन का ही कार्यकाल रहता हैं। ऐसे में शनिवार व रविवार को अवकाश मानते हुए अधिकांश कर्मचारी आठ अक्टूबर को कार्यालयों में उपस्थित हुए। इसकी सजा दिवाली के मौके पर जिले के हजारों कर्मचारियों के दो महीने के वेतन को रोककर दी जा रही हैं। जबकि प्रदेश वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मुकेश शर्मा ने इस मामले में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी कमेटी की राय के बाद सभी विभागों को पहले ही अवगत करा दिया था। कर्मचारियों का कहना है कि आदेश में स्पष्ट किया था कि छह अक्टूबर के बाद हड़ताल पर रहने वाले कर्मचारियों का ही वेतन काटा जाएगा। लेकिन छह अक्टूबर के बाद एक भी कर्मचारी हड़ताल पर नहीं थे।
आचार संहिता के बाद जारी हुए आदेश
राज्य सरकार ने पांच अक्टूबर को सख्त कदम उठाया और फैसला किया कि जो भी कर्मचारी हड़ताल पर गया उनका वेतन काटा जाएगा। वित विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मुकेश शर्मा ने इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिए थे। इसी बीच विधानसभा चुनावों के मद्देनजर छह अक्टूबर को आचार संहिता लग गई। इसके बाद हड़ताल के दौरान कर्मचारियों के वेतन का मामला अटक गया। विभिन्न कर्मचारियों संगठनों ने राज्य सरकार पर हड़ताल के दौरान का वेतन देना का दबाव बनाया।
विधानसभा चुनावों के दौरान राज्य सरकार कर्मचारियों की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती थी। इस प्रकरण को मुख्य सचिव डीबी गुप्ता की अध्यक्षता में बनी कमेटी को सौंपा गया। यह निर्णय पांच अक्टूबर की देर शाम को लिया गया था।


इनका कहना है
कर्मचारियों को अगर जल्द पूरा वेतन नहीं मिला, तो प्रदेश पदाधिकारी मुख्य सचिव राजस्थान से मिलकर शिकायत करेंगे।
मुरलीधर शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष व जिलाध्यक्ष, राजस्थान राज्य मंत्रालयिक कर्मचारी महासंघ
सरकार के आदेश होने के बाद विभाग को वेतन देना चाहिए। उपार्जित अवकाश स्वीकृत होने के बावजूद दिवाली के मौके पर वेतन काटकर विभाग ने कर्मचारियों के साथ कुठाराघात किया है।
रामगोपाल शर्मा, जिलामंत्री, पंचायत प्रसार अधिकारी संघ सीकर
सरकार की मंशा सूचना सहायकों के 11 दिन के सामूहिक अवकाश का वेतन नहीं काटने की हैं। इससे जिले के सूचना सहायकों में भारी रोष हैं।
महेंद्र महरिया, कर्मचारी नेता, सूचना सहायक संघ, सीकर