
Firing on Dussehra Ravan in Udaipurwati rajasthan
उदयपुरवाटी. आज पूरा देश विजयादशमी 2018 का पर्व मना रहा है। शाम को जगह-जगह रावण के पुतलों का दहन किया जाएगा। अधिकांश जगहों पर रावण के पुतलों को आग के हवाले किया जाता है, मगर हम आपको बता रहे हैं राजस्थान के उदयपुरवाटी के दशहरे की अनूठी परम्परा के बारे में। यहां पर दशानन के पुतले को फूंकने से बंदूक की गोलियों से छलनी किया जाता है। करीब ढाई सौ साल से रावण दहन के लिए इस दादू पंथी परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है।
रावण को इसलिए मारी जाती है गोली
-उदयपुरवाटी में नवरात्र शुरू होने के साथ ही दादूपंथी समाज की ओर से विजयादशमी पर्व की इस परंपरा के तहत धार्मिक आयोजन शुरू हो जाते हैं।
-इस परंपरा के तहत दादूपंथी पांचों अखाड़ा की ओर से दस दिनों तक तरह-तरह के आयोजन होते हैं।
-उदयपुरवाटी दादूपंथी समाज व नगरपालिका के संयुक्त तत्त्वावधान में होने वाले इस महोत्सव में सर्व समाज के लोग हिस्सा लेते हैं।
-दशहरे के दिन दादूपंथी समाज के पंचायत पांचों अखाड़े के कलाबाज हैरतअंगेज कारनामे भी दिखाते हैं।
-दस दिन तक चलने वाले इस महोत्सव के लिए दशहरा उत्सव प्रबंध समिति की देखरेख में जमात स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में तैयारियां होती हैं।
परम्परा जयपुर संभाग में मिसाल
समिति के गिरवरदास स्वामी व शिवपालदास स्वामी ने बताया कि दादूपंथी समाज की ढाई सौ साल पुरानी परंपरा पूरे जयपुर संभाग में मिसाल है। नवरात्र के पहले दिन परंपरागत तरीके से चांदमारी के रिहर्सल, दादूवाणी के अखंड पाठ, शस्त्र पूजन, कथा प्रवचन शुरू कर दिए जाते है।
उत्सव के तहत विजय पताका फहराने के लिए रणभेरी, नोबत, ढोल, ततड़ी-ताशा व झांझ बजने शुरू हो जाते हैं। दशहरा उत्सव के दौरान प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती व दादूवाणी के पाठ, चांदमारी की रस्म, श्री दादू मन्दिर एवं बालाजी मन्दिर में विशेष आरती होती रहती है। इस दौरान रसोईपूजा, चादर दस्तूर, सवामणी-प्रसाद, अधिवेशन जैसे कार्यक्रम होते हैं।
जयपुर दरबार की सेना थी दादूपंथी
उदयपुरवाटी कस्बे में झुंझुनूं रोड स्थित जमात इलाके का संबंध जयपुर के राजदरबार से है। जयपुर राजा सवाई मानसिंह ने कस्बे में जमात नामक क्षेत्र बसाया। जमात में राजा मानसिंह ने अपनी दादूपंथी सेना को बसाया।
दादूपंथी सेना हर वर्ष दशहरा महोत्सव को काफी जोर-शोर से मनाती है। दस दिनों तक धार्मिक कार्यक्रम चलते हैं साथ ही दशहरे के दिन होने वाले हैरतअंगेज कारनामो का रिहर्सल भी किया जाता है।
दशहरे की पूर्व संध्या पर मंगलकामना हवन होगा। विजयदशमी के दिन सुबह 4बजे जुजरबे (रेखला) से 101 सलामी दी जाएगी। सुबह साढ़े पांच बजे हवन की वेदी पर शस्त्रों की पूजा होती है।
11 बजे दादू मंदिर में दादूवाणी की आरती होगी। शाम 4 बजे रावण दहन के लिए दादूपंथियों का दल रवाना होकर नांगल नदी पहुंचता। वहां रावण के पुतले को गोलियों से छलनी से किया जाता है। फिर उसका दहन किया जाता है।
कई दिन पूर्व ही रिहर्सल
नांगल नदी में दादू पंथी पांचों अखाड़ा व नगर पालिका के संयुक्त तत्वाधान में होने वाले विजयादशमी पर्व को लेकर बन्दूकबाज कई दिन पूर्व ही रिहर्सल करने लग जाते हैं। निशाना साधने की तैयारी के लिए रिहर्सल में कस्बे व आसआस के गांवों से काफी संख्या में लोग शामिल होते हैं।
Published on:
18 Oct 2018 01:19 pm
