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दहशत का रूह कंपा देने वाला वो मंजर कभी नहीं भूल पाएंगे ये चार मासूम, जानिए क्या है मामला

खुद के घर से जबरन बाहर निकालने और अपहरण के डर के कारण चार मासूम बच्चों ने अपने आप को चार घंटे कमरे में कैद कर लिया। चारों के माता-पिता दोनों घर पर नहीं होने के कारण दबंगों ने बच्चों को डराया-धमकाया।
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खुद के घर से जबरन बाहर निकालने और अपहरण के डर के कारण चार मासूम बच्चों ने अपने आप को चार घंटे कमरे में कैद कर लिया। चारों के माता-पिता दोनों घर पर नहीं होने के कारण दबंगों ने बच्चों को डराया-धमकाया।

दहशत का रूह कंपा देने वाला वो मंजर कभी नहीं भूल पाएंगे ये चार मासूम, जानिए क्या है मामला

सीकर.

खुद के घर से जबरन बाहर निकालने और अपहरण के डर के कारण चार मासूम बच्चों ने अपने आप को चार घंटे कमरे में कैद कर लिया। चारों के माता-पिता दोनों घर पर नहीं होने के कारण दबंगों ने बच्चों को डराया-धमकाया। जिसके कारण चारों बच्चे बंद कमरे में चार घंटे तक रोते-बिलखते रहे। इसके बाद इनके माता-पिता घर पहुंचे तो बच्चों ने कमरे का गेट खोला और कांपते हुए परिजनों को आपबीती बताई। इधर, गोकुलपुरा गांव में घटी घटना के बाद पीडि़त पक्ष ने न्याय की गुहार लगाते हुए पुलिस अधीक्षक को दंबगों के खिलाफ परिवाद सौंपा है। जिस पर पुलिस ने कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। जानकारी के अनुसार गोकुलपुरा में रहने वाले सुरेश की पत्नी का विवाद हो जाने पर उसको उद्योग नगर थाना पुलिस अपने साथ ले गई थी। इधर, पता लगने पर सुरेश अपनी पत्नी की खातिर थाने चला गया तो पीछे से दबंग लोग कार लेकर आए और घर पर मौजूद चारों बच्चों को बाहर निकालने का प्रयास किया। मासूमों को डराया-धमकाया और घर छोड़ कर नहीं जाने पर अपहरण की धमकी दी। डर के कारण चारों मासूम बच्चों ने अपने आप को दबंगों से बचाने के लिए कमरा अंदर से बंद कर छुप कर बैठ गए। थोड़ी देर बाद डराने वाले दोबारा आए और कमरे के गेट को पीटना शुरू कर दिया। जिसके कारण चारों बच्चे दहशत में कांपने लगे और डर के कारण बाहर नहीं निकले। 12 साल की प्रियंका व सात साल की हर्षिता ने बताया कि उठा ले जाने के डर से वे बंद कमरे में चार घंटे तक रोते रहे। जिसमें दस साल का राहुल और उसकी बड़ी बहन प्रीति भी शामिल थी। इसके बाद माता-पिता घर पहुंचे तो इनकी जान में जान आई।

दिलासा देती रही बहन
बंद कमरे के बाहर दबंग हो-हल्ला कर रहे थे और अंदर बच्चों की कंपकंपी छूट रही थी। सुरेश की बड़ी बेटी प्रीति के अनुसार उसके तीनों छोटे बहन-भाई जोर-जोर से रोने लगे तो वह उनको बार-बार चुप कराती रही। दिलासा देती रही कि अभी मम्मी और पापा आ जाएंगे। इसके बाद वे लोग पुलिस की मदद लेंगे।


सहम जाते हैं बच्चे
घटना के बाद भी चारों बच्चे सदमे से उभर नहीं पाए हैं। दहशत में गुजारे वे चार घंटे याद कर अभी वे सहम जाते हैं। पीडि़त बच्चों के पिता सुरेश का कहना है कि पुलिस अधीक्षक से मिलकर घटनाक्रम का परिवाद दिया है। जिस पर उन्होंने दबंगों को पाबंद कर उनके खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है।


पीडि़त परिवार की तरफ से कुछ लोगों के खिलाफ परिवाद मिला है। संबंधित थाना पुलिस को जांच के लिए कहा गया है। डराने व धमकाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -डा. अमनदीप सिंह कपूर, पुलिस अधीक्षक सीकर