
प्रतीकात्मक तस्वीर
पूरणसिंह शेखावत
सीकर। राजस्थान के किसानों के लिए राहत की खबर है। पहली बार जिला मुख्यालय पर फसलों व बगीचों के लिए हाइटेक लैब बनाई जाएगी। अच्छी बात है कि लैब में एलोपेथी लैब की तर्ज पर पैथोलॉजिस्ट व कीट विज्ञानी रोग-कीट के कारण और उनसे बचाव के उपाय बताएंगे। जिससे किसान को होने वाले फसल में होेने वाले संभावित आर्थिक नुकसान से बचाया जा सका।
कृषि विभाग ने शुरूआती चरण में 20 जिलों में बनाए जाने वाले एग्री क्लीनिक के लिए जगह का चयन करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। आमतौर पर फसलों में होने वाले रोग कीट के कारण अक्सर किसानों को नुकसान हो जाता है। फिलहाल यह सुविधा केवल जयपुर और जोधपुर जिले में ही उपलब्ध है।
जिला मुख्यालय पर यह सुविधा शुरू किए जाने से यहां के हजारों किसान फसलों में होने वाले संक्रमण व कीट रोगों की समय पर जांच करवा सकेंगे। प्रदेश सरकार ने एग्री क्लीनिक शुरू करने के लिए 21 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया गया।
प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों में विषय विशेषज्ञों की सुविधा है लेकिन जिला स्तर पर किसानों को इनकी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। ऐसे में अधिकांश अंधाधुंध उर्वरक व कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं। जिससे किसान को फायदा होने के साथ आमजन की सेहत को नुकसान होने लगता है। ऐसे में कृषि आयुक्तालय ने जिला स्तर पर विशेषज्ञों की सुविधा पहुंचाने के लिए एग्री क्लीनिक खोलने की कवायद शुरू की है। इसके लिए पौध व्याधि और कृषि अनुसंधान अधिकारी कीट के पद स्वीकृत कर दिए गए हैं।
सीकर जिले में शुरूआती पहले चरण में बनने वाले एग्री क्लीनिक बनाने के लिए मिट्टी पानी प्रयोगशाला के पास जगह का चयन कर लिया गया है। 300 वर्ग फिट में कृषि विभाग ने भवन बनाने की कवायद शुरू कर दी गई। इस भवन में जरूरी उपकरण व मशीनरी के लिए टेंडर कर लिए गए हैं। प्रत्येक एग्रो क्लिनिक पर करीब 11 लाख रुपए की लागत आएगी. क्लिनिक में विशेषज्ञ स्टाफ भी लगाया जाएगा. सबकुछ ठीक रहा तो इस वित्तीय वर्ष में किसानों को यह जांच सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। कृषि विभाग की ओर से दूसरे चरण इस सुविधा से वंचित रहने वाले जिलों में यह जांच सुविधा शुरू की जाएगी।
राजस्थान के सीकर, झुंझुनूं, चूरू, जयपुर, अजमेर, अलवर, भीलवाड़ा, धौलपुर, दौसा, टोंक, बीकानेर, पाली, उदयपुर, हनुमानगढ़, भरतपुर, सवाईमाधोपुर, करौली, जोधपुर, कोटा और श्रीगंगानगर जिले में फसलों के क्लीनिक खुलेंगे।
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कृषि आयुक्तालय के निर्देशानुसार पहले चरण में प्रदेश के 20 जिलों में एग्री क्लीनिक खोलने की कवायद शुरू कर दी गई है। इन क्लिनिक में रोग ग्रस्त फसलों को लेकर आने वाले किसानों को संक्रमण जांच की करवा सकेंगे।
-रामनिवास पालीवाल, संयुक्त निदेशक कृषि
Published on:
15 Jan 2025 02:46 pm
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