
कभी किस्मत से बने थे प्रधान, अब बने केबिनेट मंत्री
सीकर. लक्ष्मणगढ़ विधायक गोविन्द सिंह डोटासरा ने आज प्रदेश सरकार में केबीनेट मंत्री पद की शपथ ले ली है। जल्द ही उनके विभाग का खुलासा भी हो जाएगा। बतादें कि गोविंदसिंह डोटासरा आज भले ही तीन बार विधायक रहते हुए मंत्री का पद हालिस किया है। लेकिन, कभी ऐसा दौर भी था, जब उन्हें प्रधान का पद बहुत ही दिलचस्प तरीके से मिला। दरअसल बात 2005 की है। जब डोटासरा ने पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़ा था। चुनाव तक वह प्रधान की रेस तक में नहीं थे। लेकिन, इस चुनाव मेंं जो भी प्रधान के दावेदार थे, वे चुनाव हार गए और पार्टी को प्रधान पद के लिए डोटासरा पर ही दाव खेलना पड़ा। यहां से सही मायने में उनका राजनीतिक जीवन शुरू हुआ, जो आज उन्हें मंत्री पद तक ले आया है।
ढाणी में जन्में डोटासरा
गोविंद सिंह डोटासरा का जन्म एक अक्टूबर 1964 को लक्ष्मणगढ़ के कृपाराम जी की ढाणी गांव में हुआ था। इनके पिता मोहन सिंह डोटासरा सरकारी अध्यापक थे। राजस्थान विश्वविद्यालय से बीकॉम की पढ़ाई की। एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। 4 मार्च 1984 को सुनीता देवी के साथ इनका विवाह हुआ। इन के दो बेटे हैं और पत्नी सुनीता देवी सरकारी अध्यापिका है। पढ़ाई पूरी करने के बाद गोविंद सिंह डोटासरा ने सीकर कोर्ट में वकालत शुरू की और करीब 20 साल तक की।
वकालत के साथ शुरू की राजनीति
वकालत के साथ डोटासरा ने कांग्रेस में संगठन में काम करना शुरू किया। वे युवक कांग्रेस में विभिन्न पदों पर रहे। 2005 में उन्होंने कांग्रेस की टिकट पर लक्ष्मणगढ़ से पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़ा। इस चुनाव में गोविंद सिंह विजय हुए और लक्ष्मणगढ़ पंचायत समिति के प्रधान भी चुने गए। इसके बाद तो डोटासरा का राजनीतिक जीवन लगातार बुलंदियों पर जाने लगा। डोटासरा के राजनीतिक जीवन में उनके राजनीतिक गुरु और कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष चौधरी नारायण सिंह का भी बड़ा योगदान रहा। डोटासरा लगातार सात साल तक सीकर कांग्रेस के जिला अध्यक्ष रहे।
मीडिया समिति का बनाया है अध्यक्ष
गोविंद सिंह डोटासरा प्रदेश कांग्रेस कमेटी में सचिव हैं और हाल ही में उन्हें पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए मीडिया समिति का अध्यक्ष बनाया है
पहली बार 34 वोटों से जीते चुनाव
2008 के विधानसभा चुनाव में डोटासरा टिकट तो मिल गया। इस चुनाव में लक्ष्मणगढ़ की सीट पहली बार सामान्य हुई थी इसलिए चुनाव लडऩे वालों की भी लंबी सूची थी। भाजपा ने उनके सामने मदन सेवदा को टिकट दिया था। यहां से उस समय दिनेश जोशी ने लक्ष्मणगढ़ विकास मंच नाम का संगठन बनाकर निर्दलीय ताल ठोक दी। माकपा के बृजेंद्र सिंह मील भी अपनी छवि की वजह से इलाके में मजबूत दावेदार थे। कई उम्मीदवार होने की वजह से वोटों का बटवारा हुआ और गोविंद सिंह डोटासरा महज 34 वोट से चुनाव जीत पाए।
Updated on:
24 Dec 2018 05:20 pm
Published on:
24 Dec 2018 02:22 pm
