
बच्चों को ईमानदारी का पाठ पढ़ाने वाले गुरुजी खो रहे ईमान, यूं दे रहे हैं सरकार को धोखा
सीकर. स्कूलों में बच्चों को इमानदारी का पाठ पढ़ाने वाले शिक्षक खुद बेईमानी कर आगे बढ़ रहे हैं। एेसे में उनके द्वारा तैयार बच्चों के भविष्य का अंदाजा भी सहज ही लगाया जा सकता है। हाल ही में आयोजित तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा के बाद इनकी कार गुजारी सामने आई है। जिसमें पहले से स्कूलों में नियुक्त सरकारी शिक्षक ने तथ्य छुपाकर दोबारा भर्ती में शामिल हो गए। ताकि वे अपने मर्जी के जिले में नौकरी हासिल कर सकें। एेसे चयनित होने वाले शिक्षकों की संख्या करीब दस हजार है। इनसे खफा होकर सीकर के बेरोजगार युवकों ने पुलिस अधीक्षक को परिवाद देकर इनके खिलाफ धोखाधड़ी के मुकदमे दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग रखी है।
दर्ज हो मुकदमा
बेरोजगार युवक भवानी ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर एेसे सरकारी शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग रखी है। शिकायत में भवानी सहित नरेंद्र, विकास व जगदीश आदि ने उल्लेख किया है कि रीट २०१८ लेवल प्रथम मे पूर्व से पदस्थापित राज्य कर्मचारियों ने अपने तथ्य छुपाकर व बिना शिक्षा विभाग की अनुमति लिए स्वयं को बेरोजगार बताते हुए कट ऑफ लिस्ट में स्थान प्राप्त कर लिया। एेसे हजारों पदस्थापित कर्मचारी है। जिन्होंने छल कपट कर तथ्यों को छुपाकर प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय बीकानेर में अपने आवेदन जमा कराए हैं। जबकि तथ्यों को छुपाकर आवेदन करना गंभीर गैर जमानतीय अपराध है। पुलिस को एेसे कर्मचारियों की सूची भी उपलब्ध करा दी जाएगी।
निदेशक को भेजी शिकायत
बेरोजगार राजस्थान विशेष शिक्षक संगठन ने प्रकरण की शिकायत प्रारंभिक शिक्षा निदेशक को भिजवा दी है। जिसमें अवगत कराया गया है कि एेसे तथ्य छुपाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ विभाग जांच कर इनके खिलाफ अपराधिक र्कावाही शुरू करे। ताकि इनके कारण हकीकत में बेरोजगार रहने वाले युवकों को नौकरी पाने का उनका हक मिल सके।
जारी हो चुके हैं आदेश
भर्ती के एेसे ही एक मामले में २७ जून २०१८ को राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर के सदस्य सचिव एसके जैन ने प्रदेशभर के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्षों को निर्देशित कर चुके हैं। जिसमें उल्लेख किया गया है कि विभाग में कार्यरत कनिष्ठ सहायकों (लिपिक ग्रेड-द्वितीय) एवं स्टेनोग्राफर द्वारा समकक्ष पद तथा वेतनमान वाले पदों के लिए आयोजित होने वाली परीक्षा में बैठने की अनुमति चाही जा रही है। जिनको परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाए।
पकड़ा गया झूठ
राजस्थान पत्रिका ने जब तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा की पड़ताल की तो गड़बड़ी सामने आई। उदाहरण के तौर पर राजसमंद निवासी कालूराम पुत्र रतनलाल जो वर्तमान में सवाईमाधोपुर में शिक्षक के पद पर नियुक्त था। बावजूद इसके वह दोबारा भर्ती परीक्षा में शामिल हुआ और चयन होने के बाद उसके मनमाफिक गृह जिले राजसमंद में उसको पोस्टिंग दे दी गई। जबकि नियमों के अनुसार भर्ती परीक्षा के आवेदन के दौरान कालूराम ने यह तथ्य छुपा लिया था कि वह सवाईमाधोपुर की सरकारी स्कूल में पहले से बतौर शिक्षक लगा हुआ है। उसने आवेदन के कॉलम में राज्य सरकार के स्थाई कर्मचारी होने की जगह नो भरकर धोखे से राजसमंद में पोस्टिंग हथिया ली है। जिसके प्रमाण राजस्थान पत्रिका के पास मौजूद हैं।
न्यायालय तक पहुंचा परिवाद
कुड़ली के भवानी शंकर पुत्र हरलाल सिंह की ओर से न्यायालय में परिवाद भी दायर कर दिया है। जिसमें पूर्व में पदस्थापित हजारों अध्यापकों के खिलाफ भर्ती परीक्षा के आवेदनों में स्वयं को बेरोजगार होना बता और शपथ पत्रों को छुपाकर नियुक्ति के लिए जारी कट ऑफ लिस्ट में नियुक्ति स्थान पाना शामिल है। सोमवार को सुनवाई होगी।
तथ्यों की होगी जांच
बेरोजगारों द्वारा परिवाद आने के बाद मामले की जांच निश्चित तौर पर की जानी है। पुलिस अपने स्तर पर इसकी जांच करेगी। कार्यालय में पहुंचे सभी परिवाद में भिजवाए गए तथ्यों को दिखवाया जाएगा।
विनीत कुमार, पुलिस अधीक्षक, सीकर
Published on:
08 Jul 2018 03:25 pm
