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आधे सावन बाद जमकर बरसे बदरा, झूमा तन मन

Half a century later, after a long time,
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sikar barish news

आधे सावन बाद जमकर बरसे बदरा, झूमा तन मन

आधे सावन बाद जमकर बरसे बदरा, झूमा तन मन
सीकर. आधे से ज्यादा सावन बीतने के बाद शहर सहित कई जगह हुई जोरदार बरसात से तन मन झूम उठा। किसानों के साथ व्यापारियों के चेहरे भी खिल उठे। रविवार की छुट्टी का आनंद दो गुना हो गया तो मन मयूरा भी नाच उठा। फसलों में नई जान आ गई। धार्मिक के साथ पर्यटक स्थल भी शाम को आबाद हो गए। बरसात में युवाओं व बच्चों ने नहाने का खूब आनंद लिया। बरसात खत्म होने के बाद युवाओं ने जहां पार्कों, हर्ष पर्वत व अन्य पयर्टक स्थलों का आनंद लिया वहीं किसानों ने खेत संभाले। इस सावन की यह सबसे तेज बरसात हुई। रविवार को सुबह से ही जिलेभर में बादल छाए रहे। कई बार बूंदाबांदी हुई लेकिन बादल तरसाते रहे। दोपहर करीब तीन बजे बरसात शुरू हुई जो रुकरुक सवा चार बजे तक होती रही। आधे घंटे तक तो जोरदार बरसात हुई। बरसात से रोडवेज डिपो, रीको क्षेत्र, शांति नगर, बजाज रोड, नवलगढ़ रोड सहित कई जगह पानी भर गया। डिपो तिराहे पर करीब दो फीट तक पानी भर गया। इस कारण दुपहिया वाहन चालकों को पानी निकलने का इंतजार करना पड़ा। नवलगढ़ रोड, बजाज रोड व स्टेशन रोड पर सबसे ज्यादा पानी भरा। बरसात के बाद शहर के अधिकांश हिस्सों की बिजली गुल हो गई। इस कारण लोगों को परेशानी हुई। वहीं घरों में बरसात के दौरान गर्म पकौड़ों, मिर्च बडों व अन्य गर्मागर्म व्यंजनों का स्वाद लिया गया। दुकानों पर भी चाय व गर्म व्यंजनों की खूब बिक्री हुई।
बरसात के आंकडों पर उठे सवाल
सीकर में करीब सवा घंटे तक अच्छी बरसात हुई। इस बरसात को इस सावन की सबसे तेज बरसात माना जा रहा है। लेकिन तहसील कार्यालय शाम छह बजे तक मात्र तीन एमएम बरसात ही बताता रहा। जानकारों ने बरसात के आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं। जबकि तहसील कार्यालय का कहना है आंकड़े एक दम सही है। कोई गलती नहीं हुई। बरसात रीको व डिपो तिराहे की तरफ ज्यादा हुई है, तहसील कार्यालय की तरफ तो मामूली बरसात हुई है।
फसलों में आई नई जान
बरसात के बाद फसलों में नई जान आ गई। कई दिनों से बरसात नहीं आने के कारण फसलें सूखने लगी थी। नमी भी कम होने लगी थी। कई जगह कीट व व्याधियों का प्रकोप होने लगा था। अब फसलों में जान आ गई है।
यातायात प्रभावित
डिपो तिराहे व रीको क्षेत्र में बरसात के कारण आवागमन प्रभावित रहा। लोगों को वैकल्पिक मार्गों से गुजरना पड़ा। कइयों को बरसात रुकने व पानी कम होने का इंतजार करना पड़ा।