
HIV AIDS patients increased six percent in seven year in sikar
सीकर. प्रदेश सरकार एचआईवी पीडि़तों के लिए हर साल करोड़ों रुपए खर्च करे लेकिन हकीकत यह है कि सीकर जिले में पिछले सात वर्ष के दौरान एचआईवी पीडि़तों की संख्या करीब छह गुना बढ़ गई है। जिम्मेदारों की अनदेखी के कारण जिले में एचआईवी पीडि़तों की सुध लेने के लिए कोई तैयार नहीं है। सरकारी स्तर पर एड्स की रोकथाम को लेकर कोई सघन अभियान तक नहीं चला गया है।
ART सेंटर पर पंजीकृत मरीजों के कभी चिकित्सक ऑपरेशन नहीं करते तो कभी रोडवेज बसों में रियायती कार्ड नहीं बन पाते हैं। आश्चर्य की बात है कि जिले में केयर होम सेंटर नहीं होने होने से जिले के २८ एचआईवी पीडि़त अनाथ बच्चे एक संस्था में हैं गौरतलब है कि पिछले वर्षों में जिले में केयर सेंटर बनाने की घोषणा की गई थी लेकिन घोषणा पर अमल नहीं किया गया।
यह है हकीकत
सीकर जिले में एचआईवी पीडि़तों की सर्वाधिक संख्या सीकर तहसील में है। एआरटी सेंटर पर आने वाले मरीजों में अधिकांश वे लोग है जिनका व्यवसाय के काम से बाहर आना-जाना लगा रहता है। एचआईवी पीडि़तों में दांतारामगढ़, नीमकाथाना, लक्ष्मणगढ़ तहसील के लोग शामिल है। एआरटी सेंटर की जानकारी के अनुसार एचआईवी पीडि़त मरीजों में सर्वाधिक संख्या महिलाओं की है जिनकी आयु ३० से ५० वर्ष के बीच है।
हालांकि कई उच्च वर्ग लोग एचआईवी पीडि़त होने के बाद एआरटी सेंटर पर आते तो हैं लेकिन सरकार की योजनाओं से दूर हैं। हर साल २५० से ज्यादा रोगी नए पिछले वर्षों का औसत देखा जाए तो प्रति वर्ष जिले में २५० से ज्यादा एचआईवी पीडित बढ़ जाते हैं। इसके बावजूद जिला मुख्यालय पर एचआईवी पीडि़तों के लिए सैकंड लाइन ट्रीटमेंट सुविधा नहीं है।
नहीं मिल रहा ट्रीटमेंट
चिकित्सकों ने बताया कि जन्म से ही एचआईवी पॉजिटिव बच्चों को सैकंड लाइन ट्रीटमेंट मिल जाए तो इन बच्चों की औसत आयु हो सकती है। लेकिन सरकारी स्तर पर इस दिशा में कोई प्रयास नहीं होने से २० से २२ वर्ष तक ही जी पाते हैं।
नहीं है बेहतर सुविधा
देश में एचआईवी पॉजिटिव के उपचार की दो स्टेप ही है। इन दो स्टेप में लगातार और शेड्यूल के अनुसार मरीज इलाज लेता है तो 15 से 20 वर्ष तक वह और जी सकता है। जबकि कई अस्पतालों में सात स्टेप तक मरीजों का उपचार हो रहा है। इससे मरीज 65 से 70 वर्ष तक दवा के जरिए जी सकता है।
नहीं है सैकंड लाइन ट्रीटमेंट
HIV के सैकंण्ड स्टेप के मरीज को जयपुर या जोधपुर के लिए रेफ र किया जाता है। अगर मरीज नियमित तौर पर सैंकडलाइन उपचार लेता है तो 15 से 20 वर्ष तक और जी सकता है।
विक्रम शर्मा, विहान प्रोजेक्ट
Published on:
01 Dec 2018 11:22 am
