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सीकर के एसके अस्पताल में आपसी सामंजस्य की कमी मरीजों की कर रही जेब खाली

सरकार की ओर से मिलने वाले 75 प्रकार के इंजेक्शन अस्पताल में मौजूद होने बावजूद वार्ड में मरीजों को इनकी कीमत चुकानी पड़ रही है
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यहां सीकर के एसके अस्पताल में आपसी सामंजस्य की कमी मरीजों की कर रही जेब खाली

सीकर. एसके अस्पताल में वार्ड प्रभारी और औषधि वितरण केन्द्र प्रभारी में आपसी समन्वय की कमी मरीजों की जेब ढीली करा रही है। इनमें आपसी सामंजस्य नहीं होने के कारण निशुल्क दवा योजना के तहत वार्ड में मिलने वाले इंजेक्शन भी वहां नहीं मिल पाते हैं और मरीजों के परिजनों को स्वयं खरीद कर लाना पड़ता है। सरकार की ओर से मिलने वाले 75 प्रकार के इंजेक्शन अस्पताल में मौजूद होने बावजूद वार्ड में मरीजों को इनकी कीमत चुकानी पड़ रही है। वार्ड प्रभारी, औषधि वितरण केन्द्र प्रभारी के साथ-साथ अस्पताल प्रबंधन को भी मरीजों की खाली हो रही जेब से कोई सरोकार नहीं है।

ऐसा क्यों
दरअसल निशुल्क दवा योजना के तहत मिलने वाले सभी 75 प्रकार के इंजेक्शन को वार्ड में सामान्य तापमान में नहीं रखा जा सकता है। वार्ड में आवश्यकता पडऩे पर वार्ड प्रभारी की ओर से इंडेड भरने के साथ ही ये इंजेक्शन मुख्य वितरण केन्द्र से वार्ड में उपलब्ध कराए जाते हैं। लेकिन वार्ड प्रभारी रोजाना इस माथापच्ची से बचते हुए वार्ड में इंजेक्शन नहीं होने की बात परिजनों को कहता है। परिजनों को मजबूरन इंजेक्शन खरीद कर लाने पड़ते हैं। गौरतलब है कि निशुल्क दवा योजना में करीब 600 प्रकार की दवाएं आती है। जिनमें से महज 350 प्रकार की दवाएं ही उपलब्ध हैं।


राहत के साथ आहत
अन्य इंजेक्शन की जरूरत पर मरीजों को भटकना मजबूरी होता है। ज्यादा परेशानी रात के समय होती है जब दुकानें भी एक- दो ही खुली रहती है और उन इंजेक्शन की मनमानी कीमत वसूली होती है।


निर्देश के बावजूद
योजना में इंजेक्शन उपलब्धता के सख्त निदेश के बाद वावजूद में यह स्थिति है। रातभर खुली रहने वाले डीडीसी काउंटर भी रात को बंद मिलते हैं। हालांकि हर इंजेक्शन की जरूरत हर वार्ड में नहीं रहती, लेकिन जानकारों के अनुसार करीब 40 से ज्यादा तरह के इंजेक्शन किसी भी समय काम आ सकते हैं।