
नाथूसर गांव में पसरी है खामोशी, मां, पत्नी को शहादत की खबर नहीं
मूंडरू (सीकर). गांव गमगीन! देहरी खामोश! परिवार बेहाल! नाथूसर गांव भले ही फक्र के साथ खड़ा हो, लेकिन गांव के लोगों में अजीब सी बैचेनी है। उनका अपना लाडला सरहद पर शहीद हो गया। रविवार शाम गांव का पूरा मंजर ही बदला हुआ नजर आया। सैकड़ों की भीड़ के बाद भी एक अजीब सी खामोशी चारों तरफ बिखरी थी। शहीद लोकेंद्र के घर के हालात हालांकि इनसे जुदा थे। घर के बड़ों को लोकेंद्र की शहादत की खबर थी, लेकिन मां, पत्नी और बच्चे इससे बेखबर थे। उन्हें यह बताया गया कि लोकेंद्र के पांव में गोली लगी है। घर में उत्सव का कार्यक्रम चल रहा था, लेकिन बाद में उसे स्थगित कर दिया गया। तीन साल पहले ब्याह कर आई लोकेंद्र की पत्नी अन्नू कंवर भी इससे बेखबर थी कि उसका पति शहीद हो गया। वो सहज भाव से घर परिवार की खामोशी में खामोश थी।
लोकेंद्र के बेटे के जडूला उत्सव की तैयारियां रोकी
लोकेन्द्र सिंह के घर पर उसके छह माह के बेटे दक्ष प्रताप सिंह के जडुला उत्सव को लेकर तैयारियां चल रही थी। घर परिवार के लोग घर पर मिठाइयां बनाकर मऊ के भैरव जी मन्दिर में जडुला उतारने जाने वाले थे, लेकिन इस खबर के बाद घर के बड़े बुजुर्गों ने उत्सव की तैयारियों को रोक दिया। लोकेंद्र की मां कैलाश कंवर, पिता महेंद्र सिंह व पत्नी अन्नू को लोकेन्द्र के पैर में गोली लगने से घायल होने का समाचार ही दिया गया।
तीन साल पहले हुई थी शादी
लोकेन्द्र सिंह की तीन साल पहले परबतसर नागौर के आसरवा गांव की अन्नू कँवर के साथ शादी हुई थी। लोकेन्द्र सिंह के एक बड़ा भाई कुलदीप है जो निजी वाहन चालक है। पिता घर पर खेती का काम करते है। लोकेन्द्र की माता कैलाश कंवर करीब एक साल से बीमार है।
गांव का पहला शहीद
भारतीय सेना व अद्र्ध सैनिक बलों में गांव के सैकड़ों जवान विभिन्न पदों पर सेवाएं देकर सेवानिवृत हो चुके हैं वही सैकड़ों युवा सेवारत हैं। उनमे से बहुत से सैनिक भारत-चाइना, भारत पाक व कारगिल की लड़ाइयां लड़ चुके हैं, लेकिन कभी कोई शहीद नहीं हुआ। लोकेंद्र गांव का पहला शहीद बेटा है।
Published on:
15 Jul 2018 09:30 pm
