
राजस्थान के इस मंदिर जब शिवलिंग से बही थी खून की धारा, औरंगजेब ने भी टेक दिए थे घुटने, जानिए इस मंदिर का पूरा रहस्य
प्रमोद स्वामी- खाटूश्यामजी, सीकर।
शिवलिंग पर बना यह निशान देखिए। कहते हैं कि यह औरंगजेब के सेनापति मुर्तजा खां के भाले का निशान है। और उस समय का बना हुआ है जब मुगल काल में औरंगजेब मंदिरों को ध्वस्त करता हुआ सीकर पहुंच गया था। कहते हैं कि शिवलिंग पर भाले के वार के साथ ही उसमें से खून की धार बह निकली थी। जिससे मुर्तजा खां घबरा गया और इसकी सूचना उसने औरंगजेब (Aurangzeb) को भिजवाई। जिस पर औरंगजेब खुद इस मंदिर पर हमला करने आया। लेकिन, जैसे ही औरंगजेब इस मंदिर पर आक्रमण के लिए आगे बढ़ा तो उसके पैर पहली सीढ़ी पर ही रूक गए और वह बूत की तरह खड़ा रह गया। तब मंदिर के पुजारी ने औरंगजेब को भगवान शंकर से माफी मांगने को कहा। जिस पर औरंगजेब एक बार तो नहीं माना, लेकिन, आखिरकार दो दिन बाद उसे भगवान शंकर के इस मंदिर में माफी मांगनी पड़ी। इसके बाद ही वह मंदिर से लौटा और मंदिरों पर आक्रमण नहीं करने का प्रण लिया। अब आपको यह भी बतादें कि यह मंदिर भी आस्था की उस महानगरी खाटूधाम (Khatu Dham) के मुख्य बाजार में स्थित है, जो कभी खटवांग नाम से जाना जाता था। भगवान शिव के इस प्राचीन मंदिर का स्वरूप भले ही अब आधुनिक हो चला है, लेकिन लोगों की बरसों पुरानी आस्था यहां बिल्कुल भी कम नहीं हुई है।
भारत में मुगल काल में औरंगजेब द्वारा मंदिरों को ध्वस्त करने के किस्से तो आपने खूब पढ़े और सुने होंगे। लेकिन, आज हम आपको औरंगजेब के हमले से जुड़े राजस्थान के सीकर जिले के उस शिव मंदिर में ले चलते हैं। जहां कहते हैं कि भगवान शिव ने औरंगजेब को माफी मांगने पर मजबूर कर दिया था। और जहां औरंगजेब के सेनापति की तलवार के निशान आज भी शिवलिंग पर मौजूद है। जी, हां यह मंदिर है आस्था की नगरी खाटूधाम के मुख्य बाजार में स्थित प्राचीन शिव मंदिर। जहां के लिए कहा जाता है कि भगवान शिव ने दो दिन तक औरंगजेब को अपनी सीढियों पर खड़ा भी रखा था।
मुगलकाल के समय औरंगजेब मंदिरों पर आक्रमण कर उन्हें ध्वस्त कर सोने व चांदी को लूटता हुआ खाटूधाम जो उस समय खटवांग नगरी कहलाता था में आया और अपने सेनापति मूर्तजा खां को इस प्राचीन शिव मंदिर को ध्वस्त करने के लिए भेजा।
प्राचीन शिव मंदिर मिला भव्य स्वरूप
कस्बे में सौलह सौ साल पूर्व में बने प्राचीन शिव मंदिर की कायापलट कर उसे भव्य स्वरूप मिल गया है। मंदिर छोटा होने के कारण भक्तों को दर्शन में भारी समस्या होने लगी थी। इस समस्या के समाधान के लिए एक श्याम भक्त ने मंदिर को बड़ा बनाने के लिए बीड़ा उठाया और तकरीबन 60 लाख रूपए की लागत से इसे भव्य स्वरूप दिया है। श्याम बाबा के दर्शन करने आने वाले भक्त प्राचीन शिव मंदिर के दर्शन भी करते है।
Updated on:
04 Mar 2019 04:49 pm
Published on:
04 Mar 2019 11:36 am
