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आखिर 18 माह बाद पुलिस को मिली कामयाबी

जमीनी विवाद में 18 महीने पहले की गई हत्या का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने वारदात में शामिल चार मुख्य आरोपितों को दो अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया है।
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sikar police achivment

आखिर 18 माह बाद पुलिस को मिली कामयाबी


चर्चित सुरजाराम हत्याकांड के चारों आरोपित गिरफ्तार:
हत्या के बाद यहां आकर बन गए थे ठेकेदार
सीकर. जमीनी विवाद में 18 महीने पहले की गई हत्या का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने वारदात में शामिल चार मुख्य आरोपितों को दो अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया है। हालांकि हत्या में शामिल दो आरोपितों को पकडऩे के बाद दूसरे दो आरोपितों को इसकी भनक लग चुकी थी। लेकिन, वे लोग जगह नहीं छोडे़ं और मौके से फरार नहीं हो। इसके लिए पुलिस ने भी दगा दिलवाने की चाल चली और गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपितों से उन दोनों को फोन करवाकर बात कराई कि वे लोग सुरक्षित हैं तथा पुलिस अभी उन तक नहीं पहुंच पाई है। इतना सुनने और विश्वास कर लेने के बाद बाकी दोनों आरोपित निर्भय होकर वहीं ठहर गए। इसके बाद पुलिस तुरंत उन तक पहुंची और दबिश देकर उनको भी मौके पर दबोच लिया। गिरफ्तार मुख्य आरोपितों में नेमीचंद खीचड़ विद्युत विभाग में नौकरी करता है और उसके खिलाफ दस मुकदमे दर्ज हो रखे हैं। लेकिन, विभाग ने इसको अभी तक निलंबित करने की जहमत नहीं उठाई है। गिरफ्तार बाकी तीनों आरोपित विधाधर, अजयपाल व दिलसुख पर भी पहले से कई मुकदमे दर्ज बताए गए हैं और इनमें एक का नाम आनंदपाल गिरोह से जुडे़ सुभाष बराल ने भी पुलिस को बताया था। पुलिस अधीक्षक प्रदीप मोहन शर्मा ने बताया कि १३ जून २०१७ की रात भढाढऱ में जमीन पर कब्जा करने के उदेश्य से नेमीचंद खीचड़ सहित १५ लोगों ने मिलकर परडोली निवासी सुरजाराम पुत्र किशनाराम की लाठियों व सरियों से पीट-पीट कर हत्या कर दी थी। इसके बाद सभी आरोपित मौके से फरार हो गए थे। हालांकि घटना के बाद फरार ११ आरोपित पकड़े जा चुके थे। मुख्य आरोपित नेमीचंद, अजयपाल बाजिया, विद्याधर जाट व दिलसुख वारदात के बाद हाथ नहीं लग रहे थे। उनको गिरफ्तार करने के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डा. तेजपाल सिंह, सीओ सीटी गिरधारीलाल शर्मा ने विशेष टीम का गठन किया। टीम की कमान सदर थाने के एसएचओ करण ङ्क्षसह खंगारोत को दी गई। इन्होंने टीम में शामिल उपनिरीक्षक गिरधारीलाल, कांस्टेबल ओमप्रकाश, अनिल कुमार व महेश कुमार को चारों के बारे में सूचना एकत्रित करने का जिम्मा दिया तो पता चला कि मुख्य आरोपित नेमीचंद व विधाधर जिला बांसवाड़ा में फरारी काट रहे हैं। आरोपित अजयपाल व दिलसुख जयपुर में छुपे बैठे हैं। उनको गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। यहां से चारों आरोपितों को पुलिस ने रिमांड पर लिया है। ताकि आगे की पूछताछ कर इनको भी सलाखों के पीछे पहुंचाया जा सके।
मकान मालिक ने लीक की सूचना
हत्या करने के बाद चारों आरोपित अलग-अलग जगह फरारी काटते रहे। फरारी के लिए पहले इन्होंने आदिवासी इलाके चुने। क्योंकि इन क्षेत्रों में सीकर व इनके जान-पहचान के लोग भी ठेकेदारी करते हैं। इधर, जब मामला ठंडा पड़ा तो ये लोग जयपुर व बांसवाड़ा में रहने लग गए थे। यहां अपने आप को ठेकेदार बताकर छोटे-मोटे काम के ठेके लेने लग गए और किराए का मकान लेकर परिवार को भी साथ रखने लगे थे। पुलिस ने तिरूपति नगर उदयपुर रोड बांसवाड़ा में किराए के मकान से नेमीचंद व विद्याधर को गिरफ्तार किया तो इसकी सूचना मकान मालिक ने इनकी पत्नी और बाकी परिवार वालों तक भी पहुंचा दी। परिवार के लोगों ने जयपुर की गुलाबी कॉलोनी अजमेर रोड सोढाला में एक फ्लेट में छुपे अजयपाल व टोंक रोड पिंजरापोल गोशाला के पीछे किराए के मकान में फरारी काट रहे दिलसुख को इन दोनों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिए जाने की जानकारी दे दी। ये लोग यहां से फरार होने ही वाले थे कि पुलिस ने योजना बनाकर दोनों आरोपितों को विश्वास में लेने के लिए नेमीचंद व विद्याधर से इनकी बात कराकर आश्वस्त किया कि वे लोग मजे से रह रहे हैं और पुलिस का साया इनसे कोसों दूर है। इसके बाद पुलिस ने इन दोनों को भी अपनी गिरफ्त में ले लिया।
विद्युत निगम भी कटघरे में
पुलिस के अनुसार हत्या की वारदात में शामिल नेमीचंद विद्युत विभाग में नौकरी करता है लेकिन, करोड़पति है। इसके खिलाफ विभिन्न थानों में मारपीट व अपहरण जैसी गंभीर धाराओं के दस मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। लेकिन, बावजूद इसको निलंबित नहीं करने की कार्रवाई का जवाब पुलिस की ओर से विद्युत निगम के अधिकारियों से मांगा जाएगा। पुलिस आरोपित को हिस्ट्रीशीटर व हार्डकोर अपराधियों में शामिल करने की बात भी कर रही है।
पहले भी रहा हत्या में शामिल
गिरफ्तार आरोपित विधाधर के खिलाफ २०१४ में फतेहपुर सदर में हत्या के प्रकरण सहित पांच मुकदमे दर्ज हैं। इसके अलावा अजयपाल पर मारपीट के दो प्रकरण व दिलसुख पहले से मारपीट के एक मामले में आरोपित रह चुका है। इधर, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हत्या के पुराने मामले के आरोपितों को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम के सदस्यों के नाम अवार्ड के लिए जयपुर मुख्यालय को भिजवाए जाएंगे।