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सीकर में इनता छोटा सा काम भी नहीं करवा पा रही नगर परिषद, हो रही बदनाम

सीकर. राजस्थान के सीकर शहर में नगर परिषद एक छोटे से काम के लिए बदनाम होती जा रही है। यहां की शहरी सरकार शहर में स्ट्रीट लाइटों तक की व्यवस्था नहीं कर पा रही है। यहां की कॉलोनी और मार्गों पर लगी लाइटों को 24 घंटे में दुरस्त कराने का शहरी सरकार दावा बेमानी है।
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सीकर में इनता छोटा सा काम भी नहीं करवा पा रही नगर परिषद, हो रही बदनाम


सीकर. राजस्थान के सीकर शहर में नगर परिषद एक छोटे से काम के लिए बदनाम होती जा रही है। यहां की शहरी सरकार शहर में स्ट्रीट लाइटों तक की व्यवस्था नहीं कर पा रही है। यहां की कॉलोनी और मार्गों पर लगी लाइटों को 24 घंटे में दुरस्त कराने का शहरी सरकार दावा बेमानी है। हाल यह है कि जिम्मेदारों की लचर कार्यशैली के कारण फतेहपुर रोड स्थित अम्बेडकर नगर में पिछले एक पखवाडे से स्ट्रीट लाइट बंद है। अम्बेडकर नगर के मुख्य गेट से करीब दो सौ मीटर आगे तक क्षेत्र दिन ढ़लते ही अंधेरे के आगोश में चला जाता है। लोगों को टार्च के सहारे सडक़ और गली में जाना पड़ता है। खास बात यह है कि परिषद में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अधिकारी आंखे मूंदे बैठे हैं। नतीजन क्षेत्र के लोगों का शहरी सरकार के प्रति गुस्सा बढ़ता जा रहा है। गौरतलब है कि शहर के पांच हजार से ज्यादा खम्बो पर नई एलईडी लाइट नहीं लगी है।

यह है कारण
नगर परिषद की ओर से स्ट्रीट लाइटों की शिकायत के लिए प्रत्येक खंभे को एक नम्बर दिया गया था। जिस खम्बे क लाइट खराब होती है। उसकी शिकायत दर्ज करवाई जाती थी। कुछ समय तो व्यवस्था ठीक चली इसके बाद पेंडेंसी बढऩे के कारण शिकायत मौखिक ली जाने लगी। उस पर टोल फ्री के अनुसार काम बंद हो गया। लिहाजा लोगों की सुनवाई भी बंद हो गई। यही वजह है कि शहर की ज्यादातर कॉलोनियों और रास्तों में एक बार लाइट खराब होने पर उसमें महीनों तक सुधार नहीं होता।

केवल आश्वासन
अम्बेडकर नगर के दीनदयाल दानोदिया, मोहनलाल, राधेश्याम, मूलचंद बाबर ने बताया कि परिषद के टोलफ्री नम्बर पर कई बार स्ट्रीट लाइट खराब होने की शिकायज दर्ज करवा दी गई। इसके बावजूद शहरी सरकार लाइटों को ठीक नहीं कर रही है। केवल टीम भेजने का आश्वासन दे कर पल्ला झाड जा रहा है। जबकि हकीकत यह है कि रसूखदारों के वार्डों में तुरंत लाइट ठीक करवाई जा रही है।