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मापदंडों ने किसानों को किया खरीद से दूर

सीकर. भले ही केन्द्र सरकार समर्थन मूल्य पर किसानों की फसल खरीद का दावा कर रही है लेकिन हकीकत इससे काफी दूर है।
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मापदंडों ने किसानों को किया खरीद से दूर


सीकर. भले ही केन्द्र सरकार समर्थन मूल्य पर किसानों की फसल खरीद का दावा कर रही है लेकिन हकीकत इससे काफी दूर है। केन्द्र सरकार की ओर से फसल के तय किए गए मापदंडों में किसान पूरी तरह उलझ गया है। खरीद के मापदंडों पर खरा नहीं उतरने का नाम लेकर किसानों को बैरंग लौटाया जा रहा है। इसका नतीजा है कि किसानों को खून पसीने से तैयार की गई अपनी उपज को औने-पौने दामों पर बेचना पड़ रहा है। वहीं जिन किसानों ने अपनी उपज बेच दी उनमे से सैंकडों किसानों को राशि का भुगतान नहीं हो पाया है। सीकर जिले में बने सात खरीद केन्द्रों पर 20 नवम्बर तक महज 2145 किसानों से मूंग और 102 किसानों से मूंगफली की खरीद हो पाई है। और महज 618 किसानों को ही खरीद का भुगतान हो पाया

यूं उलझे किसान
प्रदेश में इस बार खरीफ सीजन की दूसरी प्रमुख उपज मूंग के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की गई हो लेकिन प्रदेश में खरीफ की उपज निकलने से पहले ही खरीद शुरू कर दी गई। सीकर जिले में सीकर, श्रीमाधोपुर, नीमकाथाना, दांतारामगढ़, पलसाना, लक्ष्मणगढ व फतेहपुर में बनाए गए खरीद केन्द्रों पर 441 किसानों ने मूंगफली बेचने के लिए पंजीयन कराया लेकिन महज 102 किसान से ही मूंगफली खरीदी गई। इन केन्द्रों पर मूंग की खरीद के लिए 8264 किसानों ने पंजीयन कराया और 2145 किसानों से उपज खरीदी गई। किसानों की माने तो इसका बड़ा कारण ऑनलाइन पंजीयन के बाद महज पांच दिन में उपज तुलवाने की शर्त रही है। इसके अलावा भुगतान की औपचारिकता के कारण भी किसान दूर हुए हैं।

नही मिला उपज का मोल
जिले में पिछले वर्ष चने की खरीद एक अप्रेल से 30 जून तक व मूंग की खरीद अक्टूबर व नवम्बर माह में हुई। उस दौरान चने का खरीद मूल्य 4400 व मूंग का खरीद मूल्य 5575 रुपए प्रति क्विंटल रहा था। जिले में सरकारी खरीद और बिक्री में बिचौलियों का ज्यादा हाथ नहीं रहा। किसानों की संख्या जिले में सवा दो लाख से ज्यादा है। अब तक महज करीब दस प्रतिशत किसान ही अपनी उपज बेचने के लिए पंजीकृत हुए हैं। बडे पैमाने पर खरीद नहीं हो पाने के कारण किसानों को उनकी उपज का वास्तविक मूल्य नहीं मिल पा रहा है।