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कमजोर है हमारे नौनिहालों की सेहत

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की रिपोर्ट से हुआ खुलासा
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कमजोर है हमारे नौनिहालों की सेहत


जांच शिविरों में 30691 बच्चे बीमार मिले
सीकर. चिकित्सा विभाग भले ही स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का दावा करे लेकिन हकीकत यह है हमारे नौनिहालों की सेहत कमजोर साबित हो रही है। बच्चों में दांत, नेत्र, एनीमिया व चर्म रोग बढ़ते जा रहे हैं। यह हम नहीं राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिले में हुए स्कूल स्क्रीनिंग कार्यक्रम के आंकड़े बयां कर रहे हैं। कार्यक्रम में जिले में 2106 स्कूल व 1764 आंगनबाड़ी व 30 मदरसों में 16 टीम ने कैम्प लगाए। जुलाई 2016 तक अब तक आयोजित शिविरों में 30691 बच्चे बीमार मिले।
एनीमिया, दूर दृष्टि और दंत रोग सर्वाधिक
दांता, फतेहपुर,खंडेला, कूदन, लक्ष्मणगढ़, नीमकाथाना, पिपराली, श्रीमाधोपुर ब्लॉक में हुई जांच में सर्वाधिक बच्चे एनीमिया, दूर दृष्टि दोष व चर्म रोग से ग्रसित मिले। शिविर में मिले बीमार बच्चों उच्च संस्थानों में रैफर किए गए। जिनमें एनीमिया, नेत्र विकार, बच्चे दंत रोग, चर्म रोग, ह्दय रोग से पीडित मिले। जिनमें से 80 बच्चों के ह्दय रोग के ऑपरेशन कराए गए हैं। 15 बच्चे के होठ में व 12 बच्चों के हाथ-पैर मुडऩे पर ऑपरेशन कराए गए हैं।
नेत्रहीनता बड़ी वजह
सरकार की ओर से आंगनबाडी केन्द्र व सरकारी स्तर पर विटामिन की दवाएं देने का दावा किया जाता है लेकिन इसके बाद भी बच्चे आंख, चर्म व दंत रोग से पीडि़त हो जाते हैं। नेत्र चिकित्सक डा. राम सिंह ने बताया कि सफेद मोतिया, ग्लूकोमा, आंख में चोट लगने और विटामिन ए की कमी के कारण भी नेत्रहीनता की स्थिति होती है। विटामिन सी की कमी के कारण चर्म रोग व केल्सियम की कमी से हाथ-पैर टेडे हो जाते हैं। स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से संचालित निजी अस्पतालों में आंखों की अन्य मुख्य बीमारियों की चिकित्सा को प्रोत्साहित करने के लिए केन्द्र सरकार की ओर से 1500 रुपए तक प्रति केस दिए जा रहे हैं।

बीमार बच्चे मिले हैं।
जिले में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत मोबाइल हैल्थ टीम की जांच में 30691 बीमार बच्चे मिले हैं। इनमें से 26500 बच्चों को निशुल्क उपचार कराया गया है।
निर्मल सिंह, आरसीएचओ सीकर