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इसे कहते हैं मजबूरी का नाम महात्मा गांधी, तभी तो सीकर में यहां पेड़ के नीचे चलता है डाकघर

रामजीलाल ने भारमुक्त होते ही शाखा भवन को खाली करवा लिया। इस पर कर्मचारी रामचंन्द्र ने बुधवार को ऑटो में पूरे सामना को डालकर शाखा को अपने घर ले आया।
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शहडोल

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Vishwanath Saini

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Updated: 6 Oct 2016, 7:06 PM IST

इन दिनों डाक शाखा चीपलाटा चर्चा का विषय है। एक अक्टूबर को शाखा प्रभारी रामजीलाल के भारमुक्त होने पर शाखा को ग्रहों की चाल ने अपनी चपेट में ले लिया। ग्रामीणों ने बताया कि 6 माह के अंतराल में 2 कर्मचारी भार मुक्त हो गए।

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रामजीलाल ने भारमुक्त होते ही शाखा भवन को खाली करवा लिया। इस पर कर्मचारी रामचंन्द्र ने बुधवार को ऑटो में पूरे सामना को डालकर शाखा को अपने घर ले आया।

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इसके बाद एक पेड़ के नीचे शाखा को शुरू कर डाक का कामकाज निपटाया। रामचंद्र का कहना था कि डाक विभाग 100 रुपए प्रति महीना बतौर मकान किराया देता है। पूरे गांव में किराया का मकान तलाशा, लेकिन किसी ने भी मकान किराए पर नहीं दिया।