
फतेहपुर.
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उदासीनता का इससे बड़ा उदाहरण भला क्या हो सकता है जहां करीब 100 गांवों के रास्तों का सवाल हो और न तो अधिकारी कोई कदम उठाएं और न ही जनप्रतिनिधि। इसका नतीजा यह रहा है कि रेलवे ने करीब सौ गांवों के इन रास्तों पर बने अंडरपास को अपने रिकॉर्ड में नाला बना दिया। अब इनमें पानी भरे या अन्य कोई समस्या हो उसकी रेलवे की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।
Must read:
जबकि यहां जब से रेलवे लाईन डाली गई है तब से पुलिया बने हुए थे और गांवों के लोगों के आवागमन का यही एक जरिया था। रेलवे की इस करतूत का खुलासा तब हुआ जब तीन दिन पहले स्थानीय विधायक नंदकिशोर महरिया ने इन दोनों पुलिया में भरने वाले पानी के बारे में डीआरएम से सवाल पूछा। डीआरएम ने साफ शब्दों में जवाब दे दिया कि उनके रिकॉर्ड में तो ये पानी निकासी के नाले हैं।
Must read:
फतेहपुर से मंडावा और नवलगढ़ रोड पर जितने भी गांव आते हैं इनके रास्ते रेलवे लाइन के नीचे से ही थे। जब से रेलवे लाइन डाली गई थी तब से यहां पुलिया बनाए गए थे। गांवों के लोग इन्हीं रास्तों से आते जाते थे। इतना ही नहीं बीकानेर, रतनगढ़ और फतेहपुर **** आसपास के इलाकों से दिल्ली जाने वाले लोगों के लिए भी यही एकमात्र रास्ता है। अब जब ब्रॉडगेज का काम हुआ तो दोनों पुलिया को तो तोड़ दिया गया। इनके स्थान पर नए अंडरपास बनाए गए। खास बात यह है कि इन अंडरपास को रेलवे ने पानी का नाला करार दिया है। रेलवे के रिकॉर्ड में ये अंडरपास न होकर पानी के नाले हैं और कोई नुकसान होता है तो रेलवे जिम्मेदार नहीं है।
Published on:
05 Aug 2017 04:19 pm
बड़ी खबरें
View Allट्रेंडिंग
