
Rajasthan Education Department: राजस्थान के सबसे बड़े शिक्षा विभाग में लगातार आदेशों के यू-टर्न से व्यवस्था बे-पटरी हो रही है। नए शिक्षा सत्र में तीन बड़े आदेशों को लेकर शिक्षा विभाग को संशोधन जारी करने पड़े। इससे शिक्षकों में भी भ्रम की स्थिति बनी रही। खुद शिक्षा मंत्री की ओर से पहले अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की समीक्षा करने का ऐलान किया।
सरकार की ओर से दावा किया गया था विद्यालय विकास समितियों की चर्चा के बाद ही अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के संचालन को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके बाद भी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में हिन्दी माध्यम के शिक्षकों से आवेदन लिए गए। वहीं विद्यालय में मोबाइल पर पाबंदी के रोक को लेकर भी शिक्षा विभाग को संशोधन जारी करना पड़ा। इसके बाद 37 हजार से अधिशेष शिक्षकों के समायोजन के फरमान जारी हुए, लेकिन जब शिक्षक सगठनों ने विरोध जताया तो इस आदेश को भी शिक्षा विभाग को भी वापस लेना पड़े।
अंग्रेजी माध्यम स्कूल: सरकार की ओर से सत्ता में आते ही अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की समीक्षा कराने का ऐलान किया गया। इसके बाद भी सरकारी स्कूलों में औसत से अधिक नामांकन हुआ। एक्सपर्ट का कहना है कि यदि दाखिले के समय सरकार की ओर से स्प्ष्ट नीति अपनाई जाती तो अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में और नामांकन बढ़ सकता था। अंग्रेजी माध्यम के रिक्त पदों को भरने के लिए अब हिन्दी माध्यम के 18 हजार शिक्षकों को भेजने की तैयारी कर ली है।
मोबाइल पर प्रतिबंध: शिक्षा विभाग की ओर से पहले स्कूलों में मोबाइल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए गए। शिक्षक संगठनों ने मोबाइल का बहिष्कार शुरू किया तो विभाग के कई ऑनलाइन काम प्रभावित होने लगे। वहीं कई अधिकारियों की ओर से मोबाइल पर प्रतिबंध के नाम पर शिक्षकों को नोटिस थमाने की कार्रवाई शुरू कर दी। शिक्षक संगठनों के विरोध के बाद शिक्षा विभाग को मोबाइल के आदेश को लेकर यू-टर्न लेना पड़ा।
अधिशेष कर्मचारियों का समायोजन: राजस्थान के स्कूलों में 37 हजार शिक्षक एक-दो साल से अधिशेष होने से ऐसे स्कूलों में कार्य कर रहे हैं जहां उनकी जरूरत नहीं है। जबकि बड़ी संख्या में स्कूलों में नामांकन के अनुसार शिक्षक ही नहीं है। इनमे पिछले दो साल में मिडिल से क्रमोन्नत किए गए उच्च माध्यमिक विद्यालयों के तथा महात्मा गांधी रूपांतरित विद्यालयों के शिक्षक कर्मचारी शामिल हैं। इन शिक्षकों को उच्च माध्यमिक स्कूलों के साथ अधिकतर ऐसे हैं प्रारंभिक शिक्षा के प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में लगाया जाना है।
शिक्षा विभाग ने पहले आनन-फानन में आदेश जारी करने और फिर वापस लेने से विभाग का कामकाज प्रभावित होने के साथ साख खराब होती है। अधिशेष शिक्षकों के समायोजन के लिए विभाग को जिला शिक्षा अधिकारियों को अधिकार देने चाहिए, जिससे वह नामांकन के आधार पर शिक्षकों का पदस्थापन कर सके।
- राजेश शर्मा, प्रदेश महामंत्री, राजस्थान पंचायतीराज शिक्षक संघ
Updated on:
20 Aug 2024, 12:18 PM IST
Published on:
20 Aug 2024, 12:18 PM IST
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