
Sikar News : सीकर. चिकित्सा विभाग की भर्तियों की धीमी रफ्तार प्रदेश के बेरोजगारों की चिन्ता बढ़ा रही है। पहले विधानसभा और अब लोकसभा चुनाव की आचार संहिता में उलझी इन भर्तियों को लेकर प्रदेश के बेरोजगारों को एक साल से नौकरी का इंतजार है। बेरोजगारों के आंदोलन और चिकित्सा मंत्री व एसीएस चिकित्सा की पैरवी की वजह से भर्तियों को थोड़ी रफ्तार मिली। लेकिन अब मामला फिर से सत्यापन में उलझ हुआ है। दरअसल, इन भर्तियों में संविदा कर्मचारियों से भी आवेदन लिए गए थे। संविदा कर्मचारियों के नौकरी के सत्यापन में विभागों में तालमेल नहीं होने का खामियाजा बेरोजगारों को भुगतना पड़ रहा है। चिकित्सा विभाग के ही कई चिकित्सकीय संस्थानों की ओर से बेरोजगारों के सत्यापन की फाइलों को फुटबॉल बनाया जा रहा है। बेरोजगारों का कहना है कि चार जून के बाद प्रदेश में आचार संहिता भी हट जाएंगी। यदि विभाग तब तक सत्यापन सहित अन्य कार्य पूरा कर लें तो जून के पहले सप्ताह में ही नौकरी मिल सकती है।
राहत
एएनएम अभ्यर्थियों के सत्यापन का कलैण्डर जारी सीफू की ओर से एएनएम में चयनित अभ्यर्थियों के 20 जिलों की दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर कलैण्डर जारी किया गया है। इससे पहले भी सीफू की ओर से कुछ जिलों से सत्यापन का रेकॉर्ड मंगवाया गया था। बेरोजगारों का तर्क है यदि इसी कलैण्डर के साथ नर्सिंग ऑफिसर सहित अन्य का कलैण्डर जारी होता तो समय के साथ धन की बचत हो सकती थी।
आफत
रेकॉर्ड संधारण में लापरवाही, खामियाजा भुगत रहे बेरोजगार कई चिकित्सा संस्थाओं की दस्तावेज सत्यापन के नाम पर सीफू को लिखित में जवाब देकर अपना लापरवाही खुद उजागर की जा रही है। प्रदेश के एक जिले के बड़े अस्पताल की ओर से सीफू को लिखे पत्र में बताया कि हमारे कार्यालय में भवन निर्माण का कार्य जारी रहने की वजह से रेकॉर्ड इधर-उधर पड़ा है। ऐसे में रेकॉर्ड संधारित करने के लिए कम से कम 15 दिन का समय चाहिए। इससे पहले भी कई जिलों की ओर से इस तरह की लापरवाही वाले जवाब सामने आ चुक है। इससे चिकि त्सा संस्थाओं की कार्यशैली पर सवाल भी खड़े हो रहे है।
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पिछली सरकार की ओर से प्रदेश में 150 से अधिक चिकित्सा संस्थाओं को क्रमोन्नत किया गया था। इस वजह से इन अस्पतालों में नर्सिंग ऑफिसर से लेकर फार्मासिस्ट, रेडियोग्राफर, एलटी व एएनएम सहित अन्य स्टाफ की कमी है। इस कारण मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
Rajasthan Samachar :दवा वितरण योजना भी आए पटरी पर
फार्मासिस्ट की कमी होने से सबसे ज्यादा प्रभावित दवा वितरण योजना हो रही है। जबकि सीफू की ओर से अभी फार्मासिस्ट भर्ती की अस्थाई सूची भी जारी नहीं की गई है। यदि विभाग की ओर से फार्मासिस्ट भर्ती को हरी झंडी दी जाती है तो मरीजों के साथ बेरोजारों को राहत मिल सकती है।
Jobs News :इन भर्तियों का इंतजार
फार्मासिस्ट : 3067
रेडियोग्राफर : 1178
नर्सिंग ऑफिसर : 8750
लेब टेक्निशियन : 2190
एएनएम : 4847
केस 01 : आस में अस्थाई नौकरी भी छोड़ी जयपुर निवासी सुमन सहारण ने बताया कि पिछले साल चिकित्सा विभाग की ओर से भर्ती की विज्ञप्ति जारी की गई थी। इस दौरान लगा कि इस साल ही नियुक्ति मिल जाएंगी। इस वजह से दिल्ली के एक निजी अस्पताल से नौकरी छोड़ दी। विभाग की ओर से अब तक नौकरी नहीं दी गई।
केस 02 : रफ्तार से ही मिलेगी खुशियां चूरू के खंडवा गांव निवासी रामनिवास सुथार ने बताया कि चिकित्सा विभाग की भर्तियों का लेकर कई सालों से बेरोजगारों को इंतजार है। विभाग की ओर से संविदाकर्मचारियों के साथ अन्य अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच में ऑनलाइन का सहारा लेना चाहिए। विभाग की ओर से तालमेल से काम किया जाए तो जून महीने में बेरोजगारों को नौकरी की खुशियां मिल सकती है।
एक्सपर्ट व्यू
चिकित्सा विभाग की भर्तियों में देरी का खामियाजा बेरोजगारों के साथ मरीजों को भी भुगतना पड़ रहा है। बेरोजगारों के आंदोलन के बाद भर्तियों को थोड़ी रफ्तार मिली लेकिन अब सत्यापन की वजह से भर्ती लॉकडाउन है। यदि एकीकृत व्यवस्था के तहत दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाता है तो बेरोजगारों को राहत मिल सकती है। राजकुमार राड़, प्रदेश संयोजक, राजस्थान नर्सिंग संघर्ष समिति राज्य सरकार को आचार संहिता हटने के बाद 11 वर्षों से भर्ती का इंतजार कर रहे फार्मासिस्ट कैडर की भी प्रोविजनल सूची जारी कर नियुक्ति देने की प्रक्रि या शुरू करनी चाहिए, जिससे मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के पंख लग सकें। रामावतार खांडल, सदस्य, फार्मासिस्ट भर्ती संघर्ष समिति
Published on:
20 May 2024 03:33 pm
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