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वाह ! शादी हो तो ऐसी, इस राजपूत दूल्हे ने समाज में पेश की अनूठी मिसाल, सुनकर आप भी करेंगे सैल्यूट

सीकर जिले के लोसल के पास बनवासा गांव से श्रीमाधोपुर के गांव नाथूसर में बारात लेकर आए दूल्हे ने लाखों के दहेज को लौटाकर दहेज प्रथा को रोकने की मुहिम में एक मिसाल पेश की है।
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सीकर जिले के लोसल के पास बनवासा गांव से श्रीमाधोपुर के गांव नाथूसर में बारात लेकर आए दूल्हे ने लाखों के दहेज को लौटाकर दहेज प्रथा को रोकने की मुहिम में एक मिसाल पेश की है।

वाह ! शादी हो तो ऐसी, इस राजपूत दूल्हे ने समाज में पेश की ऐसी मिसाल, सुनकर आप भी करेंगे सैल्यूट

मूंडरू.

समाज में आए दिन दहेज प्रताडऩा, पीटकर घर से निकाल देना, दहेज की डिमांड पूरी नहीं करने पर केरोसिन डालकर जला देने की घटनाओं के बीच सीकर जिले के लोसल के पास बनवासा गांव से श्रीमाधोपुर के गांव नाथूसर में बारात लेकर आए दूल्हे ने लाखों के दहेज को लौटाकर दहेज प्रथा को रोकने की मुहिम में एक मिसाल पेश की है। गांव की आमावाली ढाणी निवासी रामसिंह शेखावत की पुत्री एमबीए तक पढ़ी निधु कंवर की शादी लोसल के बनवासा निवासी मोहन सिंह के बेटे आनंद सिंह के साथ हुई। समठणी में वधूपक्ष ने 5 लाख रुपए नकद व दुल्हन के नाम पांच लाख की एफडी के कागजात सहित अन्य सामग्री दी। लेकिन दूल्हे आनंद सिंह ने मना कर दिया। दूल्हे ने शगुन के रूप में पारंपरिक रूप से दिए जाने वाले केवल एक रुपया व नारियल लेकर रस्म अदा की।


दूल्हे की पहल से बदलाव की उम्मीद
शगुन के रूप में दूल्हे के द्वारा केवल रुपया और नारियल लेकर रस्म अदा करने पर बुजुर्गों ने कहा कि उन्हें अपने जमाने की याद आ गई है । दूल्हे के द्वारा इस प्रकार की पहल से युवाओं में बदलाव आएगा। दुल्हन निधु कंवर के भाई ग्राम विकास अधिकारी सुरेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि हमने बहन को दहेज में सोने-चांदी के आभूषण व कार व नकदी सहित अन्य संसाधन देने का मन बनाया था। लेकिन जयपुर में टूरिस्ट कंपनी के मालिक, बिजनेसमेन व एमकॉम तक पढ़े दूल्हे आनंद सिंह ने इसके लिए बिल्कुल मना कर दिया और शादी को साधारण रूप में करने को कहा।


बेटियों को सम्मान मिले
दूल्हे के पिता मोहन सिंह ने पत्रिका को बताया कि अब वह समय आ गया है जब समाज से दहेज प्रथा के उन्मूलन के लिए सभ्य समाज के लोगों को आगे आना होगा। दहेज ना लेने का उनका एक मात्र उद्देश्य यही है कि बेटियों को उनका वास्तविक सम्मान मिले जिससे समाज की बेटियों को आगे बढऩे के पूरे अवसर मिले।