
मजदूर के बेटे ने 10वीं बोर्ड में हासिल किए 98 प्रतिशत अंक, पिता बोले- मेरा अधूरा सपना पूरा करेगा बेटा
सीकर.
मंजिल तक पहुंचने के लिए लक्ष्य पहले से तय होते हैै। मन में कुछ करने की लग्न ने सतीश को सबकी आंखों का लाडला बना दिया। सोमवार को घोषित दसवीं के परिणाम में श्रीमाधोपुर कस्बे के सतीश ने 97.63 अंक हालिस कर परिवार का नाम रोशन किया है। सतीश के पिता सागर मल गांव में ही मजदूरी करते है। वहीं माता अंजनी देवी गृहणी है। सतीश प्रशासनिक सेवा में जाना चाहता है। सतीश कस्बे की ज्ञानदीप पब्लिक स्कूल में पढ़ाई करता है। पिता का कहना है कि मैं भी पढ़ लिखकर बड़ा आदमी बनना चाहता था लेकिन घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण नहीं बन पाया। मेरा यह सपना बेटा पूरा करेगा। इसके अलावा एलबीएस इंटरनेशनल सी.सै.स्कूल के छात्र दुर्गेश टेलर ने 93.83 प्रतिशत अंक प्राप्त किए है। वहीं प्रेरणा पब्लिक सी.सै स्कूल की छात्रा अक्षिता अग्रवाल ने 95.83 व दीपक कुमावत ने 94.33 अंक प्राप्त किए है दोनो छात्र इंजीनियर बनना चाहते है। वहीं इसी स्कूल की पूनम सैनी ने 92.33 प्रतिशत, अशोक इन्दोरा ने91.67 प्रतिशत व पूजा वर्मा ने 90.67 प्रतिशत अंक लाकर अव्वल रहे हैं।
शेखावाटी स्कूल लोसल के परवेज रहे टॉपर
लोसल के शेखावाटी शिक्षण समूह की स्कूल शेखावाटी सीनियर सैकण्डरी स्कूल के कक्षा दसवीं के विद्यार्थियों ने परिणाम में फिर नया रिकॉर्ड बनाया है। छात्र परवेज मुशर्रफ व अशोक सारण ने 97.33 अंक के साथ बाजी मारी है। होनहार ने लोसल इलाके में सबसे ज्यादा अंक हासिल किए है। स्कूल की सुलोचना ने 94.50 प्रतिशत अंक तथा मंजू भामू ने 93.50 अंक हासिल किए है। चेयरमैन बीएल रणवां ने बताया कि स्कूल के 21 विद्यार्थियों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए है। परिणाम की खुशी में संस्थान में जश्न मनाया गया। होनहारों का कहना है कि संस्थान के शिक्षकों के मागदर्शन में मिले माहौल व पढ़ाई से यह सफलता हासिल की है।
विद्याश्रम की शुभांशी रही टॉपर
पोलो ग्राउण्ड स्थित विद्याश्रम पब्लिक स्कूल की छात्रा शुभांशी शर्मा ने 92.50 तथा अंजलि जांगिड़ ने 92 प्रतिशत अंक व दिव्या ने 91 प्रतिशत अंक हासिल किए है। निदेशक प्रियन आर लाटा ने बताया कि 32 विद्यार्थियों ने 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए। छात्र अक्षत श्रीमाल ने 86 प्रतिशत अंक प्राप्त किए है। निदेशक मंजू लाटा ने बताया कि स्कूल में जश्न मनाया गया। होनहारों का कहना है कि नियमित अध्ययन और शिक्षकों के मागदर्शन के दम पर यह सफलता हासिल हुई है।
Updated on:
12 Jun 2018, 2:09 PM IST
Published on:
12 Jun 2018, 11:21 AM IST
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