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मॉकड्रिल में खानापूर्ति कर भेज दी रिपोर्ट, कोरोना में जान बचाने वाले इंजेक्शनों की कमी

वैश्विक महामारी कोरोना के नए वेरिएंट को लेकर भले ही चिकित्सा विभाग अलर्ट मोड पर है लेकिन पिछले कोरोना संक्रमण काल में हजारों मरीजों की जान बचाने वाले इंजेक्शनों की सप्लाई नहीं हुई तो संभावित मरीजों की जान पर भारी संकट आ सकता है।
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मॉकड्रिल में खानापूर्ति कर भेज दी रिपोर्ट, कोरोना में जान बचाने वाले इंजेक्शनों की कमी

मॉकड्रिल में खानापूर्ति कर भेज दी रिपोर्ट, कोरोना में जान बचाने वाले इंजेक्शनों की कमी

वैश्विक महामारी कोरोना के नए वेरिएंट को लेकर भले ही चिकित्सा विभाग अलर्ट मोड पर है लेकिन पिछले कोरोना संक्रमण काल में हजारों मरीजों की जान बचाने वाले इंजेक्शनों की सप्लाई नहीं हुई तो संभावित मरीजों की जान पर भारी संकट आ सकता है। कोरोना फैलने की आशंका पर सरकार जितनी सतर्कता बरतने का दावा कर रही है उतनी ही लापरवाही प्रदेश स्तर पर हुई दूसरी मॉक ड्रिल में देखने को मिली। अस्पतालों में प्रतीकात्मक रूप से किसी को भी कोरोना संक्रमित बनाए बिना ही आक्सीजन प्लांट, ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड से होने वाली गैस की सप्लाई को फौरी तौर पर देख कर जिम्मेदारी पूरी कर दी।
यह है हकीकत
पिछले कोरोना काल के दौरान जिले में करोड़ों रुपए खर्च करके 17 ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए थे लेकिन कल्याण अस्पताल को छोड़कर अन्य जगह इन प्लांट को चलाने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी तक नहीं है। रोजाना 5 हजार सेम्पल जांच की लेब होने के बावजूद ग्रामीण अंचल में सेम्पलिंग के लिए वीटीएम तक नहीं है। जिससे मरीजों के पास जिला मुख्यालय तक आने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। बावजूद इन खामियों के अधिकारियों ने सरकारी अस्पतालों में माॅकड्रिल सफल बताते हुए महज खानापूर्ति कर भेज दिया। -

उपकरणों की गिनती कर की कार्रवाई
चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने मंगलवार को जिले के सभी 128 पीएचसी, 37 सीएचसी, 6 उप जिला अस्पताल, दो जिला अस्पतालों मॉकड्रिल की। कई जगह तो स्टॉफ ने महज कोविड के उपचार में काम आने वाले उपकरणों को गिनकर ही रिपोर्ट तैयार करके भिजवा दी। कई जगह स्टॉफ को आॅक्सीजन कंसट्रेटर भी सही हालत में नहीं मिले। वहीं जिले के ग्रामीण अंचल में कोरोना के संभावित मरीजों के सैम्पल लेने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है।

इनकी सुध लेना भूले
डेडीकेटेड कोविड एम्बुलेंस, एम्बुलेंस स्टॉफ के लिए अलग से पीपीई किट, सैम्पलिंग के लिए वीटीएम की उपलब्धता, फिलहाल ग्रामीण अंचल से आरटीपीसीआर के कितने सेम्पल भिजवाए जा रहे हैं। कोविड के लिए किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए 24 घंटे हेल्पलाइन शुरू नहीं की गई है।