
- जोगेंद्र सिंह गौड़
सीकर। लोकतंत्र के उत्सव (Rajasthan Election 2018) में मतदाताओं का उत्साह देखकर मुर्दे भी जिंदा हो गए। बानगी यह है कि जिले में कई ऐसे बूथ हैं, जहां एजेंट ने मिलकर कुछ ऐसे लोगों के वोट डलवाए दिए। जिनको स्वर्ग सिधारे हुए कई साल व महीने गुजरे चुके हैं। लेकिन फिर भी उनके नाम से वोट डाले जाना प्रशासन की समझ के बाहर है और उनके वोटों की पहचान करने की जुगत अब जिला प्रशासन द्वारा लगाई जा रही है।
जानकारी के अनुसार जिले में कई ऐसे बूथ रहे। जहां मुर्दा व्यक्ति के नाम से भी वोट डाले गए हैं। पत्रिका पड़ताल में सामने आया है कि बूथ एजेंट ने मिलकर कुछ ऐसे वोट डलवाए हैं। जहां मतदाता को मरे अरसा हो गया और उसके नाम से फिर भी वोट पड़ गए।
केस संख्या : 01
किशनलाल पुत्र सोहनलाल की मौत एक साल पहले सडक़ दुर्घटना में हो चुकी है। लेकिन, उसका मत फिर भी डाला गया है। जबकि परिजनों का कहना है कि उनके पास उनके नाम की पर्ची आई थी।
केस संख्या : 02
छोटूराम पुत्र कानाराम की मौत दो साल पहले बीमारी से हो गई है। बावजूद इसके उनका वोट डाला गया है। जिसकी सूचना परिवार वालों के पास भी नहीं है। भाई का कहना है कि किसी ने मतदान में गड़बड़ी की है।
केस संख्या : 03
शहर के छत्रपाल सिंह पिता छगनलाल की मौत भी बीमारी के कारण तीन साल पहले हो चुकी है। लेकिन, पोलिंग बूथ में बैठे एजेंट के अनुसार मतदाता सूची में उनका नाम शामिल होने के कारण वोट डाला गया है।
किसी ने गलत डाल दिया वोट
- फर्जी मतदान की सूचना की शिकायत लिखित में नहीं आई है। फिर भी यदि मृतक के नाम पर किसी ने गलत वोट डाला है तो उसकी जांच की जाएगी। दोष साबित होने पर संबंधित बीएलओ व पोलिंग बूथ एजेंट से भी जानकारी प्राप्त की जाएगी।
-नरेश ठकराल, जिला कलक्टर व निर्वाचन अधिकारी सीकर।
Updated on:
09 Dec 2018 12:09 pm
Published on:
09 Dec 2018 12:09 pm
