शिक्षक दिवस विशेष : पत्नी की याद में सीकर के सरकारी स्कूलों पर कर दिए 30 लाख खर्च

शिक्षक दिवस विशेष : पत्नी की याद में सीकर के सरकारी स्कूलों पर कर दिए 30 लाख खर्च

Vishwanath Saini | Publish: Sep, 05 2018 04:37:33 PM (IST) | Updated: Sep, 05 2018 04:45:43 PM (IST) Sikar, Rajasthan, India

Teachers Day Special Story of Sikar

सीकर. खुड़ी छोटी निवासी पूर्व विकास अधिकारी विक्रम सिंह शेखावत पत्नी की याद में शिक्षा पर लाखों रुपए खर्च कर रहे हैं। इन्होंने महज दो साल में सरकारी स्कूलों में 30 लाख रुपए खर्च कर दिए। इनका कहना है कि पत्नी रतन कंवर ने इस काम की शुरुआत पहले ही कर दी थी। मैंने तो उनके चले जाने के बाद उनकी इच्छा को जीवित रखने का काम किया है। शेखावत ने बताया, पत्नी रतन कंवर का निधन हृदयघात के कारण हुआ।

 

उसी दिन विक्रम सिंह को भी हृदयघात के कारण अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। वो तो मौत के मुंह से बच गए, लेकिन पत्नी को नहीं बचा सके। रतनकंवर ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय रसीदपुरा खुड़ी में दो लाख रुपए की राशि खर्च कर शौचालय तथा शहीद नेमीचंद राजकीय बालिका माध्यमिक विद्यालय खुड़ी में एक वाटर कूलर का निर्माण करवाया।

 

रतनकंवर के निधन के बाद विक्रम सिंह ने राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय सांवलोदा धायलान में वाटर कूलर व टीनशैड का निर्माण करवाया। राजकीय माध्यमिक विद्यालय सांवलोदा लाडख़ानी के सभी विद्यार्थियों के लिए स्वेटर वितरित किए। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय रसीदपुरा खुड़ी में दो लाख रुपए की लागत से शौचालय, दो लाख रुपए की राशि देकर बास्केटबॉल का खेल मैदान, दो लाख रुपए देकर टीनशैड लगवाए।


बस दी, चालक का वेतन भी दे रहे
दूर-दराज से आने जाने वाले विद्यार्थियों के लिए 25 सीट की मिनी बस भी दान की। बस चालक का वेतन भी विक्रम सिंह ही दे रहे हैं। कुछ दिन पहले खुड़ी में ही एक बेटी की स्कूल फीस देने में असमर्थ गरीब पिता को देख 500 रुपए पेंशन शुरू कर दी। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय घस्सू माधोपुर में एक वाटर कूलर तथा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पलथाना में एक वाटर कूलर व टीनशैड लगा दिया।

 

शिक्षक दिवस 2018 पर जानिए कौन थे डॉ राधाकृष्णन

  • डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर सन् 1888 को जन्म तमिलनाडु के तिरुतनी गांव में हुआ था। राधाकृष्णन के पुरखे पहले कभी सर्वपल्ली नामक ग्राम में रहते थे और 18वीं शताब्दी के मध्य में उन्होंने तिरूतनी ग्राम की ओर निष्क्रमण किया था। लेकिन उनके पुरखे चाहते थे कि उनके नाम के साथ उनके जन्मस्थल के ग्राम का बोध भी सदैव रहना चाहिये।
  • इसी कारण उनके परिजन अपने नाम के पूर्व सर्वपल्ली धारण करने लगे थे।डॉ. राधाकृष्णन एक गऱीब किन्तु विद्वान ब्राह्मण की सन्तान थे। उनके पिता का नाम सर्वपल्ली वीरास्वामी और माता का नाम सीताम्मा था। उनके पिता राजस्व विभाग में काम करते थे।
  • उन पर बहुत बड़े परिवार के भरण-पोषण का दायित्व था। वीरास्वामी के पाँच पुत्र तथा एक पुत्री थी। राधाकृष्णन का स्थान इन सन्ततियों में दूसरा था। राधाकृष्णन की आरंभिक शिक्षा तिरूवल्लुर के गौड़ी स्कूल और तिरूपति मिशन स्कूल में हुई।
  • इसके बाद मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से उन्होंने पढाई पूरी की। 1902 में मैट्रिक स्तर की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की और छात्रवृत्ति भी प्राप्त की। डॉ. राधाकृष्णन ने 1916 में दर्शन शास्त्र में एम.ए. किया और मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में इसी विषय के सहायक प्राध्यापक का पद संभाला। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का विवाह 16 वर्ष की आयु में सन् 1903 में शिवाकामू के साथ हुआ।

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