
Datar singh gurjar Player
थोई.
सीकर जिले के थोई इलाके की भोफा की ढाणी तन चीपलाटा निवासी दातार सिंह गुर्जर का 12 से 18 अगस्त तक पैराओलंपिक फेडरेशन की ओर से थाईलैण्ड में होने वाली अंतरराष्ट्रीय पैराओलंपिक प्रतियोगिता के लिए लगातार तीसरी बार भारतीय टीम में चयन हुआ है।
लेकिन दातार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह जा नहीं पा रहा है। इसके लिए उसने कई भामाशाहों से सम्पर्क भी किया, लेकिन ज्यादातर ने मदद का आश्वासन देकर टरका दिया।
दातार सिंह गुर्जर ने पत्रिका से विशेष बातचीत में बताया कि कई जनप्रतिनिधियों से भी बातचीत की, लेकिन किसी ने मदद नहीं की। दातार सिंह के पिता फूलाराम व माता भगवती देवी घर पर रहकर खेती करते हैं। दो बड़े भाई हैं जिनमें बड़ा भाई हरिराम मजदूरी करता है तथा मंझला भाई अभी बेरोजगार है।
अब तक इन प्रतियोगिताओं में बढ़ाया मान
वर्ष 2014 में राजस्थान में हुई विभिन्न प्रतियोगिताओं में सीकर जिले का मान बढ़ाया। 2016 में मैसूर में हुई नेशनल प्रतियोगिता में कांस्य पदक, 2017 की विभिन्न प्रतियोगिताओं के प्रदर्शन के आधार पर सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का खिताब, 2016 की अन्तराष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश को कांस्य पदक दिलाया।
खेलों के प्रति जुनून
गुर्जर ने एमए तक पढ़ाई की है। बकौल गुर्जर बचपन से खेलों में कुछ करने का जुनून था। इसलिए पढ़ाई से ज्यादा खेलों पर फोकस किया। लेकिन सरकार संसाधन देने के बजाय खिलाडिय़ों का मजाक उड़ा रही है।
गलत इंजेक्शजन के कारण वह दिव्यांगता का शिकार हो गया। लेकिन उसने हार नहीं मानी। पहले वह सामान्य खिलाडिय़ों के साथ ही खेलते थे। लेकिन शारीरिक परीक्षण में बाहर किए जाने के बाद से वह दिव्यांगों की प्रतियोगिता में खेलने गए।
पहले कर्जा लेकर गए खेलने
इससे पहले भी गुर्जर दो बार अन्तराष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश का मान बढ़ा चुके है। श्रीलंका में हुई प्रतियोगिता में वह उधार लेकर गए थे। बाद में खेती व भाइयों की मजदूरी के पैसे से उधारी चुकाई। उनका कहना है कि यदि संसाधन मिले तो वह और देश को पदक दिला सकते हैं।
Published on:
30 Jul 2018 10:58 am
