
sikar bus depot
सीकर. एक आठवीं पास श्रमिक अतिथि देवो भव: की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है। बानगी यह है कि वह दिन-रात अपने खुद के परिश्रम व खर्चे पर बस डिपो में टूटी पड़ी कुर्सियों को सुधारने में जुटा है। ताकि जयपुर, दिल्ली या मुंबई सहित दूर-दराज से यहां पहुंचने वाले मेहमान यात्रियों को सही सलामत बैठने की सीट मिल सके और सकून से वे यहां बैठकर अपनी थकावट दूर कर सकें ताकि यहां मिले आराम को वे भूला नहीं सकें और यहां की मेहमाननवाजी सदैव उनके दिमाग में खलती रहे।
जी हां, सीकर जिला मुख्यालय फतेहपुर रोड निवासी यह सलीम पिछले कई दिनों से सीकर बस डिपो में अपनी अनूठी निशुल्क सेवा दे रहा है। जिसके तहत वह अपने औजार व मशीनें लेकर सुबह घर से निकलता है और इसके बाद यहां दिनभर यात्रियों के लिए लगाई गई टूटी कुर्सियों की साफ-सफाई और बैल्डिंग आदि कर सुधारता है। सलीम का मानना है कि दूसरी जगह से यहां पहुंचने वाले यात्री पूरे शहरवासियों के लिए बतौर मेहमान ही होते हैं।
सफर लंबा होने पर वे भी यहीं चाहते हैं कि कुछ पल कुर्सी पर बैठकर आराम से गुजारे जाएं। ताकि शारीरिक थकावट को दूर किया जा सके। लेकिन, यहां पहुंचने के बाद भी यदि उन्हें बैठने के लिए कुर्सियां तक टूटी हुई मिले तो उनका मन भी सीकर की व्यवस्थाओं के प्रति भंग हो जाता है और वे सदैव इस जगह को कोसते रहते हैं। जो कि, वह कदापि नहीं चाहता।
इसलिए भले ही इन कुर्सियों को ठीक करने का उसे मेहनताना नहीं मिले। लेकिन, वह चाहता है कि यात्री यहां से एक अच्छी मेहमाननवाजी की सोच लेकर जाए। ताकि आगे जाने पर यहां की सही सोच की चर्चा वह आगे भी कर सके।
सभी कर रहे सराहना
अनूठी निशुल्क सेवा की सराहना बस डिपो आगार के बड़े अधिकारी तक कर रहे हैं। आते-जाते यात्री भी धन्यवाद ज्ञापित कर रहे हैं। काम ज्यादा होने के कारण सलीम ने अपने साथ एक कार्मिक और अपने खर्चे पर लगा रखा है। कहना है कि कुछ दिनों पहले वह बस डिपो आया था। यहां कुर्सी टूटी होने पर उसके परिजन भी बैठने के दौरान चोटिल हो गए। खून बहने लगा तो मन में ठान लिया कि वह इसी काम को पूरा करेगा।
Published on:
08 Aug 2018 10:51 am
