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इसलिए दुखी हैं हैड मास्टर जी

पातेय वेतन पर लगे प्रधानाध्यापकों के साथ सौतेला व्यवहार
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इसलिए दुखी हैं हैड मास्टर जी

सीकर. शिक्षा विभाग के पुराने फरमान पातेय वेतन पर लगे प्रधानाध्यापकों की राह में बड़ी मुसीबत बन गए है। जिले की माध्यमिक स्कूलों में आठ साल पहले 456 सीनियर शिक्षकों को पातेय वेतन पर प्रधानाध्यापक पद पर नियुक्त किया गया था। इसके अलावा कुछ शिक्षकों को वरिष्ठ शिक्षक के पद पर माध्यमिक शिक्षा में लगाया गया था। उस समय इन शिक्षकों को बिना डीपीसी के जो वेतन मिल रहा था, उसी वेतन पर प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यग्रहण करवा दिया गया। इस मामले में कई बार शिक्षक संगठनों ने निदेशक के सामने मामले की गंभीरता को सामने रखा। कुछ दिन पहले इस संबंध में नौ वर्ष बाद माध्यमिक शिक्षा बीकानेर के संयुक्त निदेशक (प्रशिक्षण) ने वर्तमान में कार्यरत व पदौन्नत हुए शिक्षकों की सूची मांगी है।
डीपी से वंचित करने पर उठे सवाल
निदेशक ने वर्ष 2009-10 से ही पदोन्नति देने के निर्देश दिए थे। ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि वर्तमान में कार्यरत प्रधानाध्यापकों की संख्या 10 और इधर केवल 20 प्रतिशत शिक्षकों का प्रमोशन हुआ है। ऐसे में शेष शिक्षक जिन्हें प्रधानाध्यापक से प्रथम, द्वितीय लेवल के पर लगाया दिया गया।
डीपीसी से वंचित होने पर सवाल खड़े हो रहे है। 2016 में सेटअप परिवर्तन, स्टाफिंग पैट्र्न आदि प्रक्रियाओं में कुछ प्रधानाध्यापकों को हिंदी, गणित, सामाजिक, विज्ञान आदि विषयों में सैकंड लेवल पर लगा दिया गया।
इनके अलावा जो प्रधानाध्यापक वाणिज्य विषय से थे, उन्हें प्रथम लेवल मानते हुए दूसरी स्कूलों में भेज दिया। इनमें से ही कुछ शिक्षकों का प्रमोशन हो गया। जिले में फिलहाल 10 प्रधाध्यापक ऐसे है जो आज भी पातेय वेतन पर काम कर रहे है।
वाणिज्य विषय वालों की बढ़ी मुसीबत
इन सब शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों की डीपीसी अभी तक नहीं हुई है। इनमें जो शिक्षक वाणिज्य विषय के थे, उनकी परेशानी सबसे ज्यादा है।
इनका कहना है
2009-10 में जिन शिक्षकों को पातेय वेतन पर लगाकर 8 साल बाद प्रथम, द्वितीय लेवल पर लगा दिया, उनका शोषण और अपमान किया गया है। 2009-10 के सभी पातेय वेतन वरिष्ट शिक्षकों की डीपीसी 2009-10 से ही की जाए। इस संबंध में संगठन का प्रतिनिधि मंडल निदेशक को ज्ञापन दे चुका है।
उपेंद्र शर्मा, प्रदेश महामंत्री, शिक्षक संघ शेखावत