
इसलिए चौपट हो रही है सरकारी स्कूलों की व्यवस्था
सीकर.
पंचायत मुख्यालयों पर स्थित बढ़े स्कूलों के संस्था प्रधानों को दूसरी स्कूलों की जिम्मेदारी देने के बाद प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों की शिक्षण व्यवस्था चौपट होने की कगार पर हैं। क्योंकि पंचायत की अन्य स्कूलों के साथ खुद की स्कूल की जिम्मेदारी उठाना पीइइओ के लिए चुनौती बन गई है। प्रदेश के सभी पीइइओ को इतने अतिरिक्त कार्य दिए हुए है कि वे अपनी खुद की स्कूलों की प्रभावी मोनिटरिंग भी नहीं कर पाते हैं। इसके चलते इन स्कू लों में सुधार के बजाय लगातार व्यवस्थाएं बिगड़ती जा रही है।
परीक्षा परिणाम व नामांकन पर असर
प्रदेश में कुल ९८९२ स्कूलों के पीइइओ को यह जिम्मेदारियां मिली हुई है। प्रदेश में सरकारी स्कूलों के नामांकन का आधा हिस्सा यानि करीब ३० लाख विद्यार्थी इन स्कूलों में अध्ययनरत है। इन्हीं स्कूलों से हर साल अच्छे परीक्षा परिणाम की उम्मीद सरकार को होती है। प्रदेश में सरकारी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए हर साल राज्य सरकार करोड़ों रुपए खर्च भी कर रही है। लेकिन जब तक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ नहीं किया जाएगा, परिणाम नहीं मिलेंगे।
पीइइओ के अतिरिक्त कार्य
पंचायत के सभी स्कूलों की देखरेख, मूल्यांकन, कर्मचारियों का सेवा रिकॉर्ड, वेतन वृद्धि, अवकाश स्वीकृत, बच्चों के प्रवेश, टीसी, आंगनबाड़ी, स्कूलों की सालाना गाइड योजना बनाना, स्कूलों की कमियों को दूर करने के लिए ग्राम सभाओं में प्रस्ताव रखना, पुस्तकालय एवं वाचनालयों का संचालन एवं स्वीप कार्यक्रम आदि जिम्मेदारियां मिली हुई है।
पद सृजित की जरूरत
प्रदेश सरकार को शिक्षा के ढांचे को मजबुत करने के लिए पीइइओ के अधीन एक वाइस प्रिंसीपल व एक कनिष्ठ सहायक का पद सृजित कर नियुक्ति देनी होगी। उसके बाद ही स्कूलों में परीक्षा परिणाम के साथ नामांकन में वृद्धि संभव है। पंचायत स्तर की सबसे से बढ़ी स्कूल होने के चलते इन स्कूलों की मोनिटरिंग सही ठंग से होना अतिआवश्यक है।
Updated on:
18 Apr 2019 06:13 pm
Published on:
18 Apr 2019 06:13 pm
