
सूरत जैसी लापरवाही... यहां भी प्राण संकट में डाल सकती है आग
सीकर. सूरत हादसे में सामने आई लापरवाही शिक्षा नगरी की कई बहुमंजिला इमारतों का भी कडवा़ सच है। भवन निर्माण नियमों के ताक पर रखे होने से शहर मौत के मुहाने पर है। यहां आग कभी भी प्राण संकट में डाल सकती है। अतिक्रमण और अवैध निर्माण ने हमें ऐसी जगह लाकर खड़ा कर दिया है। बहुमंजिला भवनों में आग लगने पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है उधर, नगर परिषद भी जुगाड़ से ही काम चला रही है। सीकर के स्टेशन रोड पर बहुमंजिला इमारत और सूरत के कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स में लगी आग के बाद सीकर शहर में ऐसी ही तस्वीर सामने आई। भवन निर्माण स्वीकृति के दौरान फायर सेफ्टी सिस्टम के नाम पर एनओसी तो जारी कर दी जाती है, लेकिन बाद में जांच नहीं होने से बहुमंजिला भवन के मालिक भी इस तरफ ध्यान नहीं देते हैं। जबकि नियमानुसार हर वर्ष जांच कर स्वीकृति का नवीनीकरण करवाना होता है।
पाइप जोडकऱ मंजिलों में पहुंचना बड़ी चुनौती
परिषद की दमकल टीम बहुमंजिला भवन में आग लगने पर पाइप जोडकऱ आग पर काबू करने का प्रयास करती है। ऐसे में यदि आग फैल गई तो दमकलकर्मियों का मंजिल पर पहुंच पाना ही परेशानी भरा हो जाएगा। यह बात इस कार्य से जुड़े दमकलकर्मी भी स्वीकार करते हैं। भास्कर मेगा मॉल में लगी आग में भी इसी तरह की खामी सामने आई। यहां दमकल को पहुंचने में समय लगा।
शहर में स्वीकृति बिना बनीं 100 इमारतें, जिम्मेदार मौन
सीकर शहर के विस्तार के साथ बहुमंजिला भवनों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। आवासीय, व्यवसायिक अपार्टमेंट, होटल और अस्पतालों के शहर में डेढ़ सौ से ज्यादा बहुमंजिला भवन है। परिषद के तीन वर्ष पहले किए गए सर्वे में सामने आया था कि इनमें से सौ से अधिक भवनों में स्वीकृति के नियमों की पालना नहीं की गई। अधिकतर में सैडबैक ही नहीं छोड़ा गया। कई भवनों में स्वीकृति से एक मंजिल अधिक बना ली गई। नगर परिषद ने सर्वे के बाद नोटिस भी जारी किए, लेकिन कड़ाई नहीं दिखाई।
7 वर्ष से प्रस्ताव
नगर परिषद जो प्रस्ताव तैयार करती है, वे कागजों में दबकर रह जाते हैं और कुछ राज्य सरकार की स्वीकृति में उलझ जाते हैं। नगर परिषद ने करीब सात वर्ष पहले बहुंजिला भवनों की आग बुझाने के लिए हाइड्रोलिक प्लेटफार्म व लिफ्ट खरीदने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। लेकिन आज तक यह प्रस्ताव राज्य सरकार के पास अनुमति के लिए विचाराधीन है। इस संबंध में परिषद के एफओ सम्पत नारायण का कहना है कि इस संबंध में कई बार रिमाइंडर भी भेजे गए हैं। लेकिन कोई भी बात इस क्रम में आगे नहीं बढ़़ पाई।
फायर सेफ्टी सिस्टम महज दिखावा
नियमानुसार बहुमंजिला भवन की स्वीकृति से पहले फायर एनओसी लेनी पड़ती है। इसके तहत सैट बैक व अन्य संसाधनों की स्थिति को देखा जाता है, लेकिन नगर परिषद ने आंख मूंद कर ऐसे भवनों को एनओसी व स्वीकृति जारी कर दी, जहां पर अग्नि से सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। स्टेशन रोड पर भास्कर मेगा मॉल की चौथी मंजिल पर लगी आग के दौरान भी यह तथ्य सामने आया। कारण कि मॉल मे दिखावे के लिए फायर सेफ्टी सिस्टम लगाया गया था। लोगों ने उसे चलाने का प्रयास किया तो इसकी जानकारी मिली। इसके अलावा जहां पर शॉर्ट सर्कि ट हुआ। वहां भी बिजली के तारों का जंजाल फै ला हुआ था। इस मंजिल पर पानी की व्यवस्था भी नहीं थी। छत पर पानी की टंकी औंधे मुंह पड़ी थी। हादसे के बाद परिषद पल्ला झाड़ लेता है।
Published on:
25 May 2019 06:25 pm
