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लापरवाही की हद, कलेक्ट्रेट का है ये हाल

कैंटीन को बना दिया कबाड़
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sikar news

लापरवाही की हद, कलेक्ट्रेट का है ये हाल


सीकर.

पिछली सरकार के समय कलक्ट्रेट में बनी कैंटीन को जिम्मेदारों की लापरवाही ने कबाड़ बना दिया है। कांग्रेस सरकार ने फरियादियों के साथ आमजन को फायदा देने के लिए कलक्टे्रट में कैंटीन बनाई थी। कांग्रेस सरकार इसका उद्घाटन नहीं कर सकी। इसके बाद पूरे पांच साल भाजपा भी सत्ता में रही, लेकिन इसकी शुरूआत नहीं हो सकी। इस कारण कर्मचारियों के साथ फरियादियों को काफी परेशानी होती है। सात वर्ष से कैटिंन पर ताले लटके हुए है। इस संबंध में कई बार कर्मचारियों ने जिला कलक्टर व जनप्रतिनिधियों को शिकायत दी, लेकिन हर बार आश्वासन देकर टरका दिया जाता है। योजना के तहत यहां जलपान के साथ भोजन की व्यवस्था के लिए कर्मचारी यूनियन की तरफ से कैटिंगन का संचालन होना था। फिलहाल कैंटीन की हालत एेसी है कि इसको अब शुरू करने के लिए मरम्मत के लिए बजट चाहिए। भवन से प्लास्टर गिरने के साथ शीशे भी टूट गए है।
कई विभागों के पास जगह का टोटा
कलक्ट्रेट में कई विभागों के पास जगह का टोटा है। यदि यह भवन उनको आवंटित हो जाता है तो उनको काफी फायदा मिल सकता है। प्रशासन कैटिंगन शुरू नहीं करने के साथ दूसरे विभाग को आवंटित नहीं कर पा रहा है। जबकि कई विभागों के अधिकारी भवन को आवंटित करने की मांग कर चुके है।
गारंटी सीमा भी गुजरी
भवन निर्माण ठेकेदार ने भवन की गारंटी के लिए पांच साल का समय दिया था। लेकिन भवन का उपयोग किए बिना ही पांच साल का समय गुजर गया। एेसे में अब मरम्मत पर होने वाले खर्चे का जिम्मेदार कौन होगा। इस तरह के कई मामलों में मरम्मत की राशि विभाग को ही खर्च करनी पड़ती है। दूसरी तरफ कलक्टे्रट में अपने स्तर पर कैंटीन संचालित है।