
त्रिकोणीय चुनावी संघर्ष में उलझी यह लोकसभा सीट कांग्रेस के आठ विधायकों के लिए बनी प्रतिष्ठा का सवाल
सीकर. लोकसभा चुनाव के रण में जैसे-जैसे चुनाव की तिथि नजदीक आ रही है वैसे-वैसे दावेदारों के साथ समर्थकों ने प्रचार अभियान तेज कर दिया है। सीकर से लोकसभा चुनावों में इस बार मुकाबला कड़ा और चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है। प्रमुख दलों के लिए यह चुनाव करो या मरो की स्थिति वाला है। भाजपा जहां मोदी लहर सहित कई मुद्दों पर सवार है तो कांग्रेस किसानों के कर्जा माफी, बेरोजगारी भत्ता सहित अन्य योजनाओं के दम पर ताल ठोक रही है। कांग्रेस के सामने विधानसभा चुनाव में बनाए गढ़ को बचाने की चुनौती है। जिले की सभी आठ विधानसभा सीट जीतने वाले कांग्रेसी विधायकों की तो लोकसभा सीट पाने के लिए नींद सी उड़ी हुई है। उधर, भाजपा इस चुनाव में जीत के सहारे खोई साख फिर से पाने की जुगत में हैं। वहीं किसान आंदोलनों के जरिये जमीनी स्तर पर पैठ रखने वाले किसान नेता अमराराम भी पूरे दमखम से ताल ठोके हुए है। ऐसे में त्रिकोणीय संघर्ष से यहां सारे समीकरण उलझे हुए नजर आ रहे हैं।
सबसे बड़ी जीत से मंत्रिमण्डल में मिली जगह
विधानसभा चुनावों के लिहाज से देखा जाए तो जिले की आठ विधानसभा सीटों में से भाजपा के लिए लक्ष्मणगढ़ सीट सबसे प्रतिष्ठापूर्ण है। यहां से उनके प्रत्याशी को जिले में सबसे करारी हार का सामना करना पड़ा था। लक्ष्मणगढ़ से तीसरी बार विधायक जीते गोविंदसिंह डोटासरा फिलहाल राज्य सरकार में शिक्षा राज्य मंत्री के पद पर हैं। कांग्रेस के लिए दांतारामगढ़ विधानसभा सीट सबसे प्रतिष्ठापूर्ण है। यहां से कांग्रेस को सबसे कम मतों के अंतर से जीत हासिल हुई थी। इसी तरह दांतारामगढ़ सीट कांग्रेस की परम्परागत सीट हैं। वीरेंद्र सिंह इस चुनाव मेंं भाजपा के दिग्गज नेता हरीश कुमावत से मामूली मतों के अंतर से विजयी हुए हैं।
कांग्रेस के दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर
विधानसभा चुनावों में जिले की आठ सीटों पर सात पर कांग्रेस तथा एक पर कांग्रेस से बागी होकर वरिष्ठ नेता महादेव सिंह खंडेला (अब कांग्रेस में शामिल) ने जीत हासिल की थी। सीकर संसदीय क्षेत्र में शामिल चौमूं सीट पर भाजपा का कब्जा है। इस लिहाज से देखा जाए तो जिले में कांग्रेस के सामने विधानसभा चुनावों की अपनी बढ़त को कायम रखना बड़ी चुनौती है। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की बात करें तो धोद से परसराम मोरदिया, सीकर से राजेंद्र पारीक, श्रीमाधोपुर से दीपेंद्रसिंह शेखावत को अपना गढ़ बचाने के लिए काफी जोर लगाना पड़ रहा है।
भाजपा का गणित:
पिछले लोकसभा चुनावों में भाजपा के स्वामी सुमेधानंद ने सरकारी सेवा से राजनीति में नए चेहरे के तौर पर कांग्रेस के प्रतापसिंह जाट पर करीब दो लाख 39 हजार से अधिक मतों से पराजित किया था। इस बार भी भाजपा ने सुमेधानंद पर भरोसा जताया तो बगावत के सुर भी सुनाई देने लगे। हालांकि बाद में पार्टी ने डैमेज कंट्रोल करते हुए सभी नेताओं को मना लिया।
किसको कितने वोटों से मिली थी जीत
लक्ष्मणगढ़
विजयी प्रत्याशी-गोविंद सिंह डोटासरा
निकटतम प्रत्याशी दिनेश जोशी
मत मिले-98227
जीत का अंतर-22052
सीकर
विजयी प्रत्याशी- राजेंद्र पारीक
निकटतम प्रत्याशी- रतनलाल जलधारी
मत मिले-83472
जीत का अंतर-15180
दांतारामगढ़
विजयी प्रत्याशी- वीरेंद्रसिंह
निकटतम प्रत्याशी- हरीश कुमावत
मत मिले-64931
जीत का अंतर-920
श्रीमाधोपुर
विजयी प्रत्याशी- दीपेंद्र सिंह
निकटतम प्रत्याशी - झाबर सिंह खर्रा
मत मिले- 90941
जीत का अंतर-11810
धोद
विजयी प्रत्याशी- परसराम मोरदिया
निकटतम प्रत्याशी- पेमाराम( माकपा)
मत मिले-75142
जीत का अंतर-14053
नीमकाथाना
विजयी प्रत्याशी- सुरेश मोदी
निकटतम प्रत्याशी - प्रेमसिंह बाजौर
मत मिले-66287
जीत का अंतर-12615
खंडेला
विजयी प्रत्याशी- महादेवसिंह
निकटतम प्रत्याशी- बंशीधर बाजिया
मत मिले-53864
जीत का अंतर-4348
Updated on:
28 Apr 2019 11:42 am
Published on:
28 Apr 2019 11:42 am
