
समाज की कुरीतियों को दूर करना होगा
अजीतगढ़. कस्बे के निकटवर्ती ग्राम अमरसर में शक्रवार को शेखा जी की 585वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर करीब 4 दर्जन मेधावी विद्यार्थियों व अन्य विशिष्ट कार्य करने वाले लोगों का सम्मान किया। साथ ही राजपूत युवाओं ने अजीतगढ़ से जयंती स्थल शेखागढ़ अमरसर तक बाइक रैली निकाली। समारोह में राव शेखा संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष राव राजेंद्र सिंह ने कहा कि हमें शेखाजी के बताए रास्ते पर चलकर समाज में गरीबों की सेवा करनी चाहिए। शेखाजी सभी समाज व समुदाय के हितों के लिए हमेशा आगे रहते थे। उन्होंने कहा कि शेखा गढ़ के उद्धार के लिए सरकार ने पैनोरमा निर्माण के लिए 3 करोड़ 11 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं जिसका निर्माण एक माह में पूरा हो जाएगा। साथ ही 9 फीट ऊंची शेखाजी की प्रतिमा बनेगी। इस अवसर पर शेखाजी संस्थान के कार्यकारी प्रेसिडेंट जालम सिंह आसपुरा ने कहा कि हमें शेखाजी के सिद्धांतों के अनुसार समाज में फैली कुरीतियों को दूर करना है। हमें हमेशा एकजुट होकर काम करना चाहिए ताकि समाज का भला हो सके। इस अवसर पर पूर्व उपप्रमुख पूरण कंवर ने कहा कि हमें राव शेखाजी के बताए रास्ते पर चलकर समाज की गरीब लडक़ी की सेवा करनी है। समारोह के पहले हजारों लोग अमरसर बस स्टैंड पर इक_े होकर रैली के रूप में जयंती स्थल शेखा गढ़ पहुंचे जहां राव राजेंद्र सिंह समेत अतिथि और लोगों ने शेखाजी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद अतिथि शेखा गढ़ के उस कमरे में गए जहां शेखाजी का जन्म हुआ था, वहां नमन किया। इस अवसर पर अतिथियों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर संपत सिंह राजेंद्र सिंह दाता, राजेंद्र सिंह, रघुवीर सिंह राठौड़, मानसिंह शेखावत,रणजीत बांाकवत,प्रभु सिंह, मान्धाता सिंह, जयपाल सिंह उपखंड अधिकारी गोपाल सिंह, धर्मेंद्र सिंह, सज्जन सिंह रणजीत सिंह ओम प्रकाश सैनी, प्रभु दयाल सैनी अमरसर थानाधिकारी अरविंद सिंह समेत कई थे।
सशक्तिकरण के पुजारी थे शेखा
मूंडरू. क्षेत्र के गांव नाथूसर, लिसाडय़िा, बागरियावास, मऊ व मूंडरू में राजपूत समाज के लोगों के द्वारा शुक्रवार को शेखावाटी के संस्थापक महाराव शेखाजी की जयंती मनाई गई। नाथूसर स्थित राजपूत धर्मशाला में हुए जयंती समारोह में लोगों ने महाराव शेखाजी के पदचिह्नों पर चलकर समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने पर विमर्श किया। मऊ निवासी इतिहासकार मानसिंह शेखावत ने बताया कि महाराव शेखाजी अदम्य साहस के धनी थे। महिलाओं को सम्मान व उच्च दर्जा दिलाने के लिए संघर्षरत रहे। शेखाजी हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक व स्वाभिमानी वीर योद्धा थे तथा उन्होंने स्त्री रक्षक के रूप में युद्ध लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। समाज के लोगों ने शेखाजी के आदर्शों पर चलने का आव्हान किया।
Updated on:
20 Oct 2018 05:50 pm
Published on:
20 Oct 2018 05:50 pm
