
पांच दिन से पानी डूब रहा विद्युत सब स्टेशन
पांच दिन से पानी डूब रहा विद्युत सब स्टेशन
नीमकाथाना/गणेश्वर. समीपवर्ती गांव चीपलाटा में स्थित विद्युत सब स्टेशन पांच दिन से बरसात के पानी में डूबा हुआ है। कर्मचारी जान जोखिम में डालकर कार्य कर रहे है। जानकारी के अनुसार विद्युत सब स्टेशन जोहड़ के पास बना हुआ है। जोहड़ लबालब होने से पानी विद्युत सब स्टेशन की दीवार तोड़ ग्रिड के अंदर घुस गया। विद्युत विभाग के सहायत अभियंता कुंदनलाल ने बताया कि सड़क खोदकर नाला दबाने से पानी की निकासी हो सकती है। श्रीमाधोपुर उपखंड अधिकारी को समस्या से अवगत करवा दिया गया। अभी तक कोई दिशा निर्देश नहीं आए। विद्युत सब स्टेशन के अंदर करीब २ फीट तक पानी भरा हुआ है। हालांकी ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए विभाग ने सप्लाई शुरु कर रखी है,लेकिन सूत्रों ने बताया कि पानी से घिरा ट्रांस्फार्मर में फाल्ट आने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन जल्द बरसात के पानी की निकासी करें।
रात्रि चौपाल में सुनी समस्याएं
पाटन. गांव दलपतपुरा में शुक्रवार को जिला कलक्टर नरेश कुमार ठकराल ने रात्रि चौपाल में ग्रामीणों की समस्याएं सुनी। जिला कलक्टर ने चौपाल में उपस्थित प्रशासनिक अधिकारियों व कर्मचारियों को लोगों की समस्या हल करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए। चौपाल में ग्रामीणों ने बिजली की अघोषित कटौती, पानी की किल्लत, सरकारी अस्पताल मे कर्मचारियों की कमी, आदर्श विद्यालय मे स्टाफ की कमी को लेकर ज्ञापन सौंपा। सैनिक कल्याण सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रेमसिंह बाजौर ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर एसडीएम जेपी गोड़, तहसीलदार सरदार सिह गिल, नायब तहसीलदार सत्यवीर यादव, सहायक जिला शिक्षा अधिकारी अरूण माथुर, पाटन पंचायत समिति प्रधान संतोष गुर्जर, सरपंच कौशल्या देवी व रोशनलाल सहित गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
इन्द्रदेव की मेहरबानी, लेकिन बिजली वाले परेशान
जिले में इंद्र की मेहरबानी यहां के वर्षा के औसत को सुधार रही है। एक-दो साल को छोड़कर कई वर्ष से अच्छी बरसात हो रही है। उपज बढ़ रही है। किसान परम्परागत कृषि को छोड़कर आधुनिक कृषि अपनाने लगे हैं। लगातार बरसात होने से माटी की सेहत भी सुधर रही है। बाजरा, मूंग, मोठ व ग्वार का क्षेत्रफल बढ़ रहा है।
हालांकि यह जरूर है कि वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम सही नहीं होने के कारण अधिकांश पानी बहकर चला जाता है। अवैध खनन व अतिक्रमण के कारण बांध व एनीकट हर वर्ष नहीं भर रहे। इस वर्ष नीमकाथाना में कई वर्ष बाद कई एनीकट व बांध लबालब हो गए हैं। जिले में भी सर्वाधिक बरसात नीमकाथाना में हो रही है। नीमकाथाना में इसी वर्ष अब तक ६२८ एमएम बरसात हो चुकी जो औसत वर्षा ५०५ के आंकड़े से ज्यादा है। जबकि अभी तक पूरा सावन व भाद्रपद का माह शेष है। यदि दोनों माह में बरसात जारी रही तो आंकड़ा और बढ़ सकता है। पिछले दस वर्ष में सबसे ज्यादा बरसात वर्ष २०१० में ८३१.८५ एमएम दर्ज की गई थी। जबकि २००९ में इंद्र की मेहरबानी कम रही। औसत वर्षा का आंकड़ा मात्र २४०.८६ पर सिमट गया था। कई जगह चारे-पानी का संकट हो गया था। सूखे जैसे हालात भी बन गए थे।
Updated on:
29 Jul 2018 09:11 pm
Published on:
29 Jul 2018 09:11 pm
