
If system of buying Mahua should be stronger then economy of tribals
सिंगरौली. आदिवासियों का जीवनयापन महुआ पर निर्भर है। महुआ फूल के संग्रहण में पूरे परिवार के साथ मेहनत कर लाखों कमा तो लेता है, लेकिन मेहनत के अनुरूप आदिवासियों को महुआ की कीमत नहीं मिल रही है। मेहनत तो आदिवासी करते हैं लेकिन बड़ा मुनाफा बिचौलिए कमाते हैं।
महुआ खरीद की उचित व्यवस्था हो तो आदिवासियों की आमदनी दो गुना हो जाए। महुआ फूल से घर के अर्थव्यवस्था चलाने वाले ओखरावल निवासी कांति प्रसाद बैगा बताते हैं कि पिछले करीब डेढ़ महीने में परिवार के साथ मिलकर 10 क्विंटल महुआ फूल एकत्र किया और सूखाया है, लेकिन उसकी कीमत केवल 3500 रुपए प्रति क्विंटल मिल रही है।
जबकि खरीदार व्यापारी उसे बाहर ले जाकर करीब दो गुना कीमत में बिक्री करेगा। यही वजह है कि वह अभी महुआ बेचने को तैयार नहीं है। ठेंका के सुमन साकेत कहते हैं कि उनके गांव के सभी लोग एक व्यापारी को 30 से 35 रुपए प्रति किलोग्राम के रेट से हर रोज महुआ की बिक्री कर देते हैं। वजह कोई दूसरा विकल्प नहीं है। सुमन कहते हैं कि जो व्यापारी कह दे, समझो वही महुआ का रेट है।
माड़ा का जंगल है केंद्र बिन्दु
जिले में सबसे अधिक महुआ माड़ा क्षेत्र में होता है। क्षेत्र में हजारों की संख्या में महुआ के पेड़ हैं। वहां के जंगल में धरी-मूढ़ी सहित आस-पास के अन्य गांवों के आदिवासी परिवार होली के बाद से डेरा जमा लेते हैं और पूरा सीजन वहां महुआ फूल संग्रहण करते हैं। वर्तमान में भी आदिवासी समुदाय जंगल में ही डेरा जमाए है। सपरिवार वर्तमान में वहीं रहना और खाना-पीना हो रहा है। वहीं महुआ एकत्र करने और सुखाने का कार्य चल रहा है। अभी एक महीने तक यह सिलसिला जारी रहेगा।
प्रत्येक सप्ताह कर देते हैं बिक्री
महुआ फूल संग्रहण में जुटे ज्यादातर आदिवासी परिवार प्रत्येक सोमवार को पहाड़ से नीचे आते हैं। माड़ा में प्रत्येक सोमवार को लगने वाले बाजार में उनके द्वारा एकत्र किया गया महुआ फूल की बिक्री कर दी जाती है। इस वर्ष वहां व्यापारियों से अधिकतम कीमत 3500 रुपए प्रति क्विंटल मिल रही है। जबकि बाजार में महुआ लेने वाले फुटकर व्यापारी थोक विके्रता को 600 से 700 रुपए प्रति क्विंटल की दर से बेचते हैं।
10 हजार क्विंटल से अधिक उत्पादन
महुआ फूल की खरीदी और बिक्री के उचित बंदोबस्त न होने का नतीजा है कि यहां पर उत्पादन का भी सही अंदाजा लगा पाना मुश्किल हो रहा है, लेकिन आदिवासी समुदाय से जुड़े लोगों के मुताबिक जिले भर में 10 हजार क्विंटल से अधिक महुआ फूल का संग्रहण किया जाता है। इसमें करीब आधा हिस्सा अकेले माड़ा क्षेत्र का होता है। छोटे पैमाने पर महुआ फूल का संग्रहण करने वाले उसे निजी उपयोग में ले लेते हैं।
Published on:
16 Apr 2022 11:16 pm
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