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आबूरोड. मनुष्य की अधिकतम आयु सौ वर्ष की आंकी जाती है, लेकिन वर्तमान समय की बात करें तो बीमारियों व अस्वस्थ्य जीवनशैली के चलते ७९ वर्ष की औसत आयु पार करना भी लोगों के लिए असमभव सा प्रतीत होता है। वहीं चंद लोग ऐसे भी होते हैं, जो इस पड़ाव को आसानी से पार कर उम्र का शतक लगा लेते हैं।कुछ ऐसी ही कहानी है आबूरोड के मालीवास निवासी १०६ वर्षीय गजीदेवी माली की। जब गजी देवी अपने परपोते की पुत्री से मिली, तो उनका चेहरा खुशी से खिल उठा। आखिर अपनी पांचवीं पीढ़ी से मिलने की खुशी हर किसी को कहां मिलती है।
जानकारी के अनुसार गजी देवी का जन्म १९१३ में सिरोही तहसील के मंडवारिया गांव में हुआ था। जिसके बाद उनका विवाह मोहब्बतनगर निवासी वीनाराम माली के साथ हुआ। करीब बीस वर्ष से अपने पौतों के साथ वह आबूरोड के मालीवास में रह रही है। परपोते हितेश माली व अन्य परिजनों ने बताया कि गजी देवी की उम्रकरीब १०६ वर्ष हो चुकी है।
चलने फिरने में सक्षम, बच्चों को दुलारना भी है पसंद
जहां वृद्धावस्था में प्रवेश करने के साथ ही लोगों को चलने-फिरने समेत विभिन्न प्रकार की परेशानियां होती है, लेकिन १०६ वर्ष की उम्र होने के बावजूद गजी देवी आज भी कुछ दूरी तक चलने में सक्षम है। गजी देवी अपने पोतो व परपोतों के साथबातचीत भी कर लेती है।परिजनों ने बताया कि गजी देवी उम्रदराज होने के बावजूद थोड़ा-बहुत चलने के अलावा देखने, सुनने व बोलने में भी सक्षमहै।
सादा जीवन, शुद्ध खानपान लम्बी उम्र का राज
गजी देवी ने लम्बी का राज सादा जीवन व शुद्ध खानपान बताया। परिजनों ने बताया कि पूर्व में ग्रामीण परिवेश में रहने के दौरान गजी देवी पशुओं की देखभाल भी करतीथी।खान पान में उन्हें दूध-दही घी के साथ चपाती व गेंहू का करबा (दलिया) पसंद है।
Updated on:
12 Feb 2019 03:48 pm
Published on:
12 Feb 2019 03:48 pm
