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राजस्थान के ऐतिहासिक मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब, दो बीघा में बनाई रसोई, लॉरियों से पांडाल तक पहुंचाई प्रसादी

जावाल के नीलकंठ महादेव व सांचियाव माता के ऐतिहासिक मेले में हजारों लोग शरीक होते हैं। इस दौरान मेलार्थियों के लिए महाप्रसादी के लिए करीब दो बीघा में रसोई बनाई जाती है।

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मेले में प्रसादी ग्रहण करते श्रद्धालु। (फोटो- पत्रिका)

राजस्थान में जावाल शहर के नीलकंठ महादेव के 14वें व सांचीयाव माता के 20वें वार्षिकोत्सव का चामुंडा गरबा मंडल के तत्वावधान में साधु-संतों के सानिध्य में आयोजन हुआ। इस दौरान मंदिर परिसर में शुभ मुहूर्त में महाभिषेक, महापूजन, महाआरती, ध्वजारोहण सहित दिनभर धार्मिक अनुष्ठान हुए। मंदिर परिसर में दिनभर दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा। मेले में सिरोही, जालोर व पाली सहित कई राज्यों के लोग मेले में शरीक हुए। मेले में बाजार, मेला स्थल, पांडाल, हाट बाजार सहित चहुंओर लोगों की भीड़ नजर आई।

महाप्रसादी में उमड़े श्रदालु

महोत्सव के दौरान महाप्रसादी का आयोजन हुआ। इसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। महाप्रसादी के लाभार्थी सेन फैंसी देवी धर्मपत्नी फुलाराम गोयल परिवार रहे। महोत्सव के दौरान जावाल के रामगिरी महाराज, लक्ष्मणदास महाराज, त्रिवेणगिरि महाराज, ईश्वर भारती महाराज व शंकरपुरी धूणी के पूरणगिरि महाराज सहित कई संतों का सानिध्य रहा।

महोत्सव के दौरान सिरोही सांसद लुम्बाराम चौधरी, जिलाध्यक्ष रक्षा भंडारी, पूर्व विधायक विधायक संयम लोढ़ा, डीएसपी मुकेश चौधरी सहित कई जनप्रतिनिधियों, राजनेताओं व अधिकारियों ने की शिरकत की। महोत्सव के दौरान मेला स्थल पर वाहनों की रेलमपेल नजर आ रही थी। इस दौरान वाहन पार्किंग में वाहनों की लंबी कतारें लगी रही।

जगह जगह की जल-शरबत की व्यवस्था

महोत्सव के दौरान गर्मी के मौसम को देखते हुए लोगों के लिए कई जगह पेयजल व शरबत की व्यवस्था की, जिसमें बस स्टैंड, अम्बेडकर सर्किल आदि जगहों पर भामाशहों की ओर से शरबत व पानी की व्यवस्था की गई। महोत्सव के दौरान शांति व यातायात व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस ने मेले में उत्पात मचाते छह युवकाें को शांतिभंग में गिरफ्तार किया।

दो बीघा में रसोई

जावाल के नीलकंठ महादेव व सांचियाव माता के ऐतिहासिक मेले में हजारों लोग शरीक होते हैं। इस दौरान मेलार्थियों के लिए महाप्रसादी के लिए करीब दो बीघा में रसोई बनाई जाती है। दरअसल हजारों लोगों के लिए महाप्रसादी बनाई जाती है।

यूं करते हैं संचालन

दरअसल मेले में अलग-अलग श्रद्धालुओं के महाप्रसादी ग्रहण करने के लिए अलग-अलग टैंट लगाए जाते हैं। इसमें शहरवासियों को महोत्सव से पूर्व ही अलग अलग जिम्मेदारी के लिए परिचय पत्र जारी किए जाते हैं। जिसमें वे लोग अपनी अपनी जिम्मेदारियों पर खरे उतरकर ऐतिहासिक मेले को सफल बनाने अहम भूमिका निभाते हैं।

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लॉरियों से रसोईघर से पांडाल तक ले जाते प्रसादी

महोत्सव में कार्यकर्ता अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए रसोई घर से पांडाल तक लॉरियों में भोजन सामग्री भरकर पांडाल तक पहुचाते हैं। जहां मौजूद कार्यकर्ता श्रद्धालुओं को परोसते हैं। दरअसल मेले में श्रद्धालुओं की दिनभर भीड़ भाड़ रहती है। ऐसे में रसोई से महाप्रसादी पांडाल तक कार्यकर्ताओं की ओर से लॉरी ले जाने के लिए संकेतक रूप में बाजे का इस्तेमाल करते हैं।

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