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अधरझूल में अटकी भारतमाला योजना

माउंट आबू. केन्द्र सरकार की ओर से संचालित भारतमाला परियोजना के तहत पिछड़ा वर्ग, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए दूरदराज के आस्था स्थलों को राष्ट्रीय राजमार्ग से जोडऩे की योजना के तहत पश्चिमी भारत के सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित गुरु शिखर को राष्ट्रीय राजमार्ग से जोडऩे की कार्ययोजना संबंधित विभागों की शिथिलता की वजह से अधरझूल में लटकी हुई है। दरअसल, भारतमाला परियोजना के तहत एनएच २७ से गुरु शिखर को जोडऩे के लिए पूर्व में किवरली से तलहटी होते हुए मार्ग का चयन किया गया था। जिसके लिए एनएचए, वन विभाग, पीडब्ल्यूडी से लेकर संबंधित विभागों से कई दौर की बैठकों के बाद किवरली से तलहटी तक फोरलेन में तब्दील करने, तलहटी से गुरु शिखर तक डबललेन करने का निर्णय किया गया था। जिसके तहत सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर डीपीआर तैयार कर सक्षम स्वीकृति को भेजी जानी थी। इसी बीच लोगों की ओर से प्रस्ताव आया कि यह मार्ग किवरली के बजाय तरतोली से साईंबाबा मंदिर मानपुर क्षेत्र होते हुए तलहटी की ओर से लिए जाने से मार्ग की अधिक उपयोगिता होगी। जिस पर इस मार्ग को किवरली के बजाय तरतोली की ओर से तब्दील करने की योजना बनी। लेकिन प्रस्तावित रेलवे लाइन पर पुल निर्माण को लेकर विभिन्न विभागों की अलग-अलग राय सामने आने पर यह कवायद अधरझूल में लटक गई।
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sirohi

अधरझूल में अटकी भारतमाला योजना

माउंट आबू. केन्द्र सरकार की ओर से संचालित भारतमाला परियोजना के तहत पिछड़ा वर्ग, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए दूरदराज के आस्था स्थलों को राष्ट्रीय राजमार्ग से जोडऩे की योजना के तहत पश्चिमी भारत के सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित गुरु शिखर को राष्ट्रीय राजमार्ग से जोडऩे की कार्ययोजना संबंधित विभागों की शिथिलता की वजह से अधरझूल में लटकी हुई है। दरअसल, भारतमाला परियोजना के तहत एनएच २७ से गुरु शिखर को जोडऩे के लिए पूर्व में किवरली से तलहटी होते हुए मार्ग का चयन किया गया था। जिसके लिए एनएचए, वन विभाग, पीडब्ल्यूडी से लेकर संबंधित विभागों से कई दौर की बैठकों के बाद किवरली से तलहटी तक फोरलेन में तब्दील करने, तलहटी से गुरु शिखर तक डबललेन करने का निर्णय किया गया था। जिसके तहत सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर डीपीआर तैयार कर सक्षम स्वीकृति को भेजी जानी थी। इसी बीच लोगों की ओर से प्रस्ताव आया कि यह मार्ग किवरली के बजाय तरतोली से साईंबाबा मंदिर मानपुर क्षेत्र होते हुए तलहटी की ओर से लिए जाने से मार्ग की अधिक उपयोगिता होगी। जिस पर इस मार्ग को किवरली के बजाय तरतोली की ओर से तब्दील करने की योजना बनी। लेकिन प्रस्तावित रेलवे लाइन पर पुल निर्माण को लेकर विभिन्न विभागों की अलग-अलग राय सामने आने पर यह कवायद अधरझूल में लटक गई।
यह है योजना का प्रारूप
पूर्व में तयशुदा प्रारूप के अनुसार करीब ४१ किलोमीटर के इस मार्ग पर बनास नदी के बड़े पुल से लेकर पांच छोटे पुलों का जीर्णोद्धार किया जाना था। मार्ग पर जानमाल के लिए खतरा बने ३३ संकरे व अंधे मोड़ों को आवागमन को सुगम बनाने को सीधे करने, बनास व तलहटी पर बड़ा जंक्शन बनाने, परियोजना के तहत ३८ सार्वजनिक व निजी संपत्तियों की आवाप्ति, पहाड़ी क्षेत्र से आने वाले बरसाती पानी की निकासी का ध्यान रखते हुए पहाड़ी की ओर सड़क किनारे निकासी नालियां, खाई की ओर मजबूत सुरक्षा दीवार निर्मित कर भारतमाला योजना को अमलीजामा पहनाया जाना था।
नहीं हो पा रहा विभागों का सामंजस्य
किवरली से तलहटी वाले पूर्व मार्ग के बजाय इसे तरतोली खड़ात से मानपुर की ओर बदलने से बीच में रेलवे लाइन आ रही है। जिसके लिए विभाग का कहना है कि पुल अंडर ग्राउंड बने। दूसरा विभाग कहता है कि रास्ता ओवरब्रिज हो। एनएचआई व रेलवे की ओर से संयुक्त निरीक्षण होगा। निरीक्षण में देरी की वजह से कार्य में विलंब आ रहा है। दोनों विभागों के सामंजस्य से कार्य को शीघ्र पूरा कर योजना को अमलीजामा पहनाए जाने को बल दिया जा रहा है।
इनका कहना है
यह कार्य पहले एनएचआई की ओर से किया जाना प्रस्तावित था। लेकिन २८ दिसम्बर २०१८ को विभाग को प्राप्त एक पत्र के अनुसार अब इसे एनएच डिवीजन बड़ौदरा को स्थानांतरण कर दिया गया है। इसलिए वर्तमान में परियोजना की क्या स्थिति है उसके सम्बंध में विभाग को कोई पुख्ता अधिकारिक जानकारी नहीं है।
-राघव त्रिपाठी, प्रबंधक एनएचआई, पालनपुर