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आबूरोड. इस बार होलिका दहन २० मार्च बुधवार को चतुर्दशीयुक्त पूर्णिमा में किया जाएगा। २१ मार्च गुरुवार को धुलंड़ी मनाई जाएगी। २० मार्च रात ९ बजे तक भद्रा रहेगी। इससे होलिका दहन भद्रा के बाद ९:१५ बजे से करना श्रेष्ट रहेगा। भद्राकाल में होलिका दहन करने से उस क्षेत्र में अशुभ घटनाएं हो सकती है। नारद पुराण के अनुसार होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा का भद्रा रहित प्रदोष काल में करना चाहिए। होलिका दहन के समय चंद्रमा सिंह राशि में रहेगा। सिंह का स्वामी सूर्य बुध का मित्र ग्रह होने के कारण आपसी समता व प्रेम बढ़ेगा। अबकी बार सुबह १०.४८ से रात ९ बजे तक भद्रा रहेगी। इसलिए होलिका दहन का शुभ मुहूर्त भद्रा काल के बाद ही होगा। १४ मार्च से होलाष्टक लग जाने तथा १५ मार्च से १४ अप्रेल तक मीन की संक्रांति होने से सभी प्रकार के मांगलिक कार्य बंद रहेंगे।
इसलिए अशुभ होलाष्टक
होलाष्टक के इन आठ दिनों में ग्रह अपने स्थान में बदलाव करते है। माना जाता है कि होलाष्टक में ग्रहों का स्वभाव उग्र हो जाता है। सभी नौ ग्रह अष्टमी से पूर्णिमा तक उग्र रहतें है। इसी कारण से होलाष्टक के चलते कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है।
१४ से होलाष्टक १५ से मलमास
१४ मार्च के बाद एक महीने के लिए मांगलीक और वैवाहिक कार्यो पर रोक लग जाएंगी। १४ मार्च से होलाष्टक और १५ मार्च से मीन मलमास लगेगा। होलाष्टक २१ मार्च को समाप्त हो जाएंगे, लेकिन मीन मलमास के कारण मांगलीक कार्य नहीं हो सकेंगे। १४ अप्रेल को मीन मलमास समाप्त होगा। देव गुरु बृहस्पति की राशि मीन में सूर्य प्रवेश करेंगे। इसके बाद वह अपली उच्च राशि मेष में प्रवेश करेंगे। सूर्य का मीन राशि में जाने को मलमास या खलमास कहा जाता है।
Updated on:
14 Mar 2019 11:05 am
Published on:
14 Mar 2019 11:05 am
