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सिरोही. सावन में शनि अमावस्या 11 अगस्त को मनाई जाएगी। इसी दिन हरियाली अमावस्या भी है। दो अमावस्या एक साथ होने से इस दिन का महत्व बढ़ जाता है। विधि
विधान से पूजा करने पर शनि की दशा से मुक्ति मिलती है। यह योग भी दुर्लभ है।
पंडित कालिकाप्रसाद ने बताया कि इस दिन जाप, हवन व पूजा का विशेष महत्व रहेगा, विशेष कर जिन जातकों की कुण्डली में शनि की महादशा, अंतर दशा व प्रत्यंतर दशा है या फिर साढ़े साती चल रही है। वे इस दिन शनि देव की साधना करें। जीवन के दोष एवं संकटों के नाश के लिए शनिश्चरी अमावस्या सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। शनि व हरियाली अमावस्या का योग पांच वर्ष बाद बन रहा है। इसी दिन काल सर्प, पितृ शांति आदि का विधान बताया है। शनि, राहू, केतु या जन्म कुंडली में अन्य अशुभ दोषों से जीवन में आने वाले संकटों के निवारण के लिए अमावस्या को महत्वपूर्ण माना है।
यह है महत्व
ज्योतिषियों की मानें तो इस बार शनिवार को हरियाली अमावस्या आने से बारिश के योग बन रहे हैं। इस दिन शिवजी को जल चढ़ाने से कालसर्प, पितृदोष, साढ़े साती व ढैया आदि परेशानी से राहत मिल सकती है। प्रकृति प्रेमी इस दिन पौधरोपण भी करते हैं। हरियाली अमावस्या पर बागों में झूला झूलने की परंपरा है।
राशि अनुसार उपाय
मेष- शिव को गुड़ चढ़ाएं।
वृष- चंदन के इत्र का दान करें।
मिथुन- गन्ने के रस से अभिषेक करें।
कर्क- दूध एवं जल से अभिषेक करेंं।
सिंह- २१ बिल्व पत्र चढ़ाएं।
कन्या- ५ फलों का दान करें।
तुला- पंचामृत से अभिषेक करें।
वृश्चिक- तांबे का सर्प शिव को चढ़ाएं।
धनु- केसर युक्त जल चढ़ाएं।
मकर- श्रीफल भेंट करें।
कुंभ- पांच बिल्व पत्र पर श्रीराम लिखकर चढ़ाएं।
मीन- दूध एवं केसर चढ़ाएं।
दशामाता की मूर्तियों की बिक्री बढ़ी
माउंट आबू. हरियाली अमावस्या, दशा माता महोत्सव मनाने को लेकर गुरुवार को दिनभर बाजारों में दशा माता की मूतियों की खरीदारी को लेकर लोगों की भीड़ उमड़ी। नवरात्र की भांति ही व्यापक स्तर पर मनाया जाने वाला यह दस दिवसीय धार्मिक उत्सव अमावस्या से आरंभ होता है। शहरी क्षेत्र में हो रहे दशामाता के आयोजनों की देखादेखी ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका अच्छा खासा प्रचलन बढऩे लगा है। ऐसे में लोगों ने दशा माता की मूर्तियां खरीदी।
Published on:
10 Aug 2018 11:25 am
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