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आबूरोड. राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के घाटे का खामियाजा कर्मचारियों को भी भुगतना पड़ रहा है। जी हां हम बात कर रहे हैं चालक.परिचालकों की ओर से ड्यूटी के अलावा किए जाने वाले ओवरटाइम के पारिश्रमिक का। इस खून-पसीने के पारिश्रमिक को राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम लंबे समय से दबाए हुए हैं। यूं तो कर्मचारियों की ड्यूटी आठ घंटे से ज्यादा नहीं बनती, लेकिन रोडवेज के चालक-परिचालकों से इससे अधिक कार्य करवाया जा रहा है। आबूरोड रोडवेज आगार में कार्यरत करीब १५० चालक-परिचालकों समेत कर्मचारियों का पारिश्रमिक बकाया है।
पत्रिका ने मामले की पड़ताल की तो चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। कर्मचारियों को लंबे समय से ओवरटाइम ड्यूटी की राशि नहीं मिलने की बात सामने आई। कई कर्मचारियों की तो अप्रेल 1998 से ओवरटाइम का भुगतान अटका हुआ है। किसी कर्मचारी के पांच लाख का भुगतान अटका हुआ है। वहीं कर्मचारियों का कहना है कि उनसे ड्यूटी तो काफी हार्ड ली जा रही है, लेकिन ओवरटाइम की राशि नहीं दी जा रही है। नई भर्ती भी नहीं की जा रही है। इससे कर्मचारियों की कमी के कारण दूसरे कर्मचारियों को ड्यूटी देनी पड़ रही है। ड्यूटी भी निर्धारित से काफी ज्यादा है।
लम्बे रूट पर जाने के बाद भी आराम कहा
चालक-परिचालकों की कमी के कारण 12 से 15 घंटे की ड्यूटी ली जा रही है। नियमानुसार ओवरटाईम के करने के बाद चालक-परिचालकों को अगले दिन आराम का मौका दिया जाना चाहिए। लेकिन कार्मिकों के अभाव में उन्हें लगातार नौकरी करनी पडती है। खास बात यह है कि ओवरटाइम की राशि भी प्रतिमाह मिलनी चाहिए, लेकिन इसकी पालना नहीं हो रही है। कई कर्मचारियों को तो ओवरटाइम ड्यूटी का भुगतान सेवानिवृत्ति के बाद भी नहीं हुआ है।
रियायती दर का भी पड़ रहा असर
राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम विभिन्न श्रेणी के यात्रियों को नि:शुल्क या रियायती दर पर यात्रा करवाता है। इस छूट का सरकार समय पर भुगतान नहीं करती। ऐसे में रोडवेज को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है। यदि रोडवेज की ओर से बसों में रियायत को थोड़ा कम कर दिया जाए तो ज्यादा दिक्कत नहीं आए।
इनका कहना है...
रोडवेज कर्मचारियों के ओवरटाइम भत्ता सेवानिवृती के बाद ही दिया जाता है। १९९८ से भुगतान के बाद नहीं दिया गया, सेवानिवृति पर ही मिलता है।
- मोहनलाल मीणा, मुख्य प्रबंधक आबूरोड आगार।
Published on:
22 Feb 2019 10:38 am
