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सिरोही. शहर की सडक़ों पर गड्ढों और आवारा पशुओं की समस्या को लेकर हाईकोर्ट सख्त है। मौखिक टिप्पणी में अफसरों को जेल भेजने की बात कही है। इसके बावजूद अधिकारी सक्रिय नहीं हुए हैं। सिरोही जिले में दोनों प्रमुख समस्याएं हर ओर देखी जा सकती हैं। पत्रिका ने इन्हीं समस्याओं पर पड़ताल की। नगर परिषद जहां आवारा मवेशियों को पकडऩे, सडक़ बनाने और सफाई के काम करवाती है तो सार्वजनिक निर्माण विभाग करोड़ों की राशि से सडक़ों का निर्माण तथा मरम्मत करवाता है लेकिन वर्तमान में हर सडक़ पर गड्ढे हैं और कई स्थानों पर तो वाहन चालकों का चलना दुश्वार हो गया है। शहर में हर सडक़ पर आवारा पशु देखे जा सकते हैं।
यह है आदेश
हाईकोर्ट ने राजधानी सहित प्रदेश के विभिन्न शहरों में सडक़ों को आवारा पशुओं व गड्ढों से मुक्त रखने के लिए तीन सप्ताह में सिस्टम विकसित करने को कहा है। साथ ही, अदालती आदेशों की पालना में ढिलाई पर नाराजगी जाहिर करते हुए मौखिक टिप्पणी की है कि अधिकारियों को जेल भेजने के अलावा कोई चारा नहीं है। पालना के लिए अंतिम मौका देते हुए सुनवाई 31 अगस्त दोपहर दो बजे तक टाल दी है।
सडक़ पर बेचा चारा
तो होगा जब्त
हाईवे पर आवारा पशु मंडराने का मुख्य कारण है चारा बेचना। जोधपुर में तो हाईकोर्ट के आदेश के बाद सडक़ों पर चारा बेचने वालों के खिलाफ नगर निगम सख्त रवैया अपना रहा है। चारा गोशाला ले जाया जा रहा।
गड्ढे तोड़ रहे कमर
निर्माण विभाग एवं नगर परिषद की ओर से सडक़ों की सार संभाल नहीं करने के कारण क्षतिग्रस्त हो गई हैं। दुपहिया वाहन चालकों को कमर दर्द का दंश झेलना पड़ रहा है। अब भी अधिकारी सख्त नहीं हुए तो हाईकोर्ट के आदेशानुसार जेल जाना पड़ेगा।
यहां मंडराते हैं पशु
शहर के पैलेस रोड, अस्पताल के बाहर, अहिंसा सर्किल, तीन बत्ती चौराहा, अनादरा चौराहा, भाटकड़ा विद्यालय के बाहर, बसस्टैण्ड, राजमाता धर्मशाला, सरजावाव दरवाजा तथा सदर बाजार में दिनभर आवारा पशुओं को देखा जा सकता है। सिरोही नगर परिषद सभापति ताराराम माली का कहना है कि पशुओं को पकडऩे का अभियान चलाया गया है।
Published on:
13 Aug 2018 10:02 am
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