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Ram Mandir: राजस्थान के कारसेवक शंकरलाल माली ने कहा- घर से बिना बताए अयोध्या के लिए निकले, तीन दिन जेल में रहे

locationसिरोहीPublished: Jan 20, 2024 02:28:05 pm

Submitted by:

Nupur Sharma

Ram Mandir: अयोध्या में 22 जनवरी को श्री राम जन्म भूमि पर होने वाली भव्य राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर चहुंओर राम भक्तों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।

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Ram Mandir अयोध्या में 22 जनवरी को श्री राम जन्म भूमि पर होने वाली भव्य राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर चहुंओर राम भक्तों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। महोत्सव को लेकर चारों तरफ श्री राम के जयकारे गूंज रहे है। राम मंदिर आंदोलन में भाग लेने वाले कारसेवकों की तो खुशी देखते ही बन रही है। सिरोही जिले से 1990 व 1992 में बहुत से कारसेवक अयोध्या गए थे। उनके लिए रामजन्म भूमि पर राम मंदिर का निर्माण और रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा देखना किसी सपना साकार होने जैसा है। सिरोही से अयोध्या गए कारसेवक विश्व हिन्दू परिषद के जिला अध्यक्ष शंकर लाल माली ने बताया कि वर्ष 1990 में सिरोही जिले से बहुत से राम भक्त अलग-अलग टुकडिय़ों में रवाना हुए।

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घर से बिना बताए निकले अयोध्या
कारसेवक विहिप के जिला अध्यक्ष शंकरलाल माली ने बताया कि उन्होंने अयोध्या जाने का निश्चय कर लिया था। इसलिए वे परिजनों को बिना बताए ही सिरोही से अयोध्या के लिए रवाना हो गए। क्योंकि घर बताते कि अयोध्या जा रहे हैं तो परिजन मना कर देते। इसलिए मंदिर में एकत्रित होकर सभी कार्यकर्ता बिना बताए रवाना हो गए। बाद में दूसरे दिन घर वालों को पता चला कि हम अयोध्या के लिए निकले है। इसी तरह सिरोही निवासी कारसेवक सोहनलाल कुम्हार भी परिजनों को बिना बताए रवाना हो गए। सोहनलाल शाम को रंग पेंट का काम करके जैसे ही घर आए तो घर से पहले मंदिर में कुछ लोग एकत्रित थे और जय श्री राम के जयकारे लगा रहे थे। यह देखकर वे वहीं रुक गए और वहां से कार्यकर्ताओं के साथ अयोध्या के लिए रवाना हो गए। ऐसे अन्य भी कई लोग थे।

हाथों पर मुहर लगा कर किया था पाबंद
कारसेवक माली ने बताया कि तीन दिन जेल में रहने के बाद कार्यकर्ताओं के हाथों पर मुहर लगा कर व पाबंद कर छोड़ा गया। इसके बाद संगठन के आदेश पर सभी कार्यकर्ता वापस अपने घरों की ओर लौट गए। उसके पश्चात 1992 में फिर कार सेवा का अवसर आया, तब यूपी में भाजपा का शासन था एवं तत्कालीन मुख्य मंत्री कल्याण सिंह ने स्पष्ट कहा था कि ढांचा भले ही टूट जाए पर वे गोली चलाने का आदेश नहीं देंगे। उस कारसेवा में भी लाखों लोग अयोध्या पहुंचे तथा ढांचे को नेस्तनाबूद किया। उस संघर्ष के बाद आज अयोध्या में भव्य श्री राम मंदिर का निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा आंखों से देखने का सौभाग्य मिल रहा है। हमारे लिए इससे बड़ी खुशी कुछ नहीं हो सकती।

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सिरोही से प्रकाशराज मोदी के नेतृत्व में शंकर लाल माली, सोहन लाल कुम्हार व अरविन्द सिंह सहित अन्य कारसेवक रवाना हुए। शंकरलाल माली ने बताया कि वे जिस ट्रेन में बैठे वह पूरी कार सेवकों से भरी हुई थी। चारों तरफ जय श्री राम के जयकारे लग रहे थे। दिल्ली पहुंच कर सभी कार्यकर्ता अयोध्या की ट्रेन में बैठ गए। पुलिस ने उनकी ट्रेन को रास्ते में टूंडला स्टेशन पर ही रुकवा लिया और कार सेवकों को ट्रेन से उतार कर अस्थाई जेलों में बन्द कर दिया। विश्व हिन्दू परिषद का भी आदेश था की बिना किसी टकराव के गिरफ्तार हो जाएं। इसलिए सभी गिरफ्तार हो गए। यहां से सभी को करीब ढाई घंटे पैदल चलाकर ट्रकों के माध्यम से आगरा ले जाकर अस्थाई जेल में तीन दिन रखा गया। जेल में भी कार्यकर्ताओं ने उपद्रव शुरू कर दिया, ताकि कैसे भी यहां से निकलकर अयोध्या पहुंच सके। यहां भीड़ ने जैसे ही जेल के गेट को तोड़ा तो पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया। कार्यकर्ता भी पुलिस से भिड़ गए, जिसमें कई कार्यकर्ताओं के चोटें भी आई।

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