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आबूरोड. रोडवेज ने चलती बस में यात्रियों की तमाम गतिविधियों पर नजर रखने के लिए लाखों की लागत से सीसीटीवी कैमरे तथा स्पीड, लोकेशन आदि का पता लगाने के लिए वीटीएस सिस्टम तो लगवा लिए, पर विडम्बना यह है कि ये बंद पड़े हैं। ऐसे में यात्रियों के साथ होने वाली घटना तथा बसों में चोरियों पर अंकुश नहीं लग पाता है। इससे सीसीटीवी कैमरों का भी औचित्य नजर नहीं आ रहा है।
दरअसल जिस फर्म को मॉनिटरिंग का जिम्मा सौंपा गया था, उसका कार्य मुख्यालय की ओर से स्थगित कर दिया गया है। इसके चलते तीन माह से मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही है।
उल्लेखनीय है कि रोडवेज प्रबंधन ने बसों में सीसीटीवी कैमरे लगवाए थे। इससे बिना टिकट यात्रा पर अंकुश लगा था। वहीं परिचालकों पर भी प्रबंधन की सीधी नजर थी। इसके लिए रोडवेज प्रबंधन ने आबूरोड आगार की 42 बसों में सीसीटीवी कैमरे लगा दिए। इसका नियंत्रण डिपो में मुख्य प्रबंधक कार्यालय में रखा गया। कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया गया था।
सीसीटीवी कैमरों के साथ वीटीएस सिस्टम का रख-रखाव आगार स्तर पर नहीं होने से सभी बसों में तीसरी आंख बंद पड़ी है तो कई में वीटीएस सिस्टम बंद पड़ा है। खुदा-न-खास्ता कोई बड़ी घटना हो जाए तो न तो फुटेज मिल सकते हंै और न ही चलती बस की गतिविधियों का रेकार्ड। हफ्ते भर पहले एक यात्री का बैग चोरी हुआ था, जिसको लेकर वह काफी परेशान हुआ। उसने बस स्टैण्ड पर शिकायत भी की, लेकिन पता नहीं लग पाया।
इसलिए लगवाए
दरअसल, बसों में यात्रियों की संख्या, निर्धारित स्टॉपेज पर रुकने का पता लगाने के लिए कैमरे लगवाए थे। वहीं एक्सप्रेस बसों के स्टॉपेज नहीं होने पर भी रुकने पर पाबंदी की की व्यवस्था की थी।
इनका कहना है...
&जिस फर्म ने कैमरा तथा वीटीएस सिस्टम लगाए थे, उसका अनुबंध समाप्त हुआ है, नए अनुबंद के बाद ही ये उपकरण काम करेंगे।
संदीप, मैनेजर ऑपरेशन, आबूरोड आगार
Updated on:
26 Oct 2018 11:47 am
Published on:
26 Oct 2018 11:47 am
