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आबूरोड. शिक्षा विभाग की ओर से विद्या मंदिर में पढऩे आने वाले विद्यार्थी को कोई परेशानी नहीं हो इसके लिए आए दिन नए नवाचार एवं आदेश जारी कर बच्चों को सरकारी विद्यालय में मिलने वाली योजनाओं से लाभ दिलवाने के प्रयास किए जा रह है। इसी तरह अन्नपूर्णा दूध योजना में मिलावट खोरी को खत्म करने के लिए अजीबो गरीब तरीका निकाला है। अब सरकारी स्कूल में योजना के तहत वितरित होने वाले दूध को पहले संस्था प्रधान को चखना होगा। उसके बाद ही बच्चों में बांटना होगा। यहीं नहीं दूध बांटने से पहले लेक्टोमीटर से मानकों की जांच भी करनी होगी। संस्था प्रधान को खुद दूध चखने के बाद रोजाना जांच का बहीखाता बनाना होगा। रजिस्टर में उसकी एंट्री करनी होगी। बच्चों की सेहत को लेकर सख्त हुए शिक्षा विभाग ने सभी विद्यालयों को आदेश जारी किए हैं।
पिछली सरकार ने लागू की थी योजना
सरकारी स्कूलों में बच्चों के मानसिक विकास को लेकर पिछली सरकार ने अन्नपूर्णा दूध योजना की शुरुआत की थी। योजना जुलाई माह में शुरू हुई थी। पहले सप्ताह में तीन दिन बच्चों को दूध बांटा जाता था, लेकिन बाद में योजना की सफलता पर प्रतिदिन व्यवस्था लागू की गई। हालांकि स्कूलों के निरीक्षण के समय अधिकारियों ने दूध की लेक्टोमीटर से जांच कर चखा, बावजूद मिलावट को लेकर कई खबरें सामने आ रही थी।
चिकित्सा विभाग से जांच के आदेश
मिड डे मील आयुक्त ने यहां तक निर्देश दिए हैं कि पहले विद्यालय के प्रभारी स्वयं दूध को चख कर देखें और स्वाद सही होने की स्थिति में विद्यार्थियों को बांटा जाए। इसके अलावा समय-समय पर चिकित्सा विभाग को भी दूध के सैंपल को जांच के लिए भेजा जाए। इसके लिए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी किए हैं।
कितना मिलेगा
अन्नपूर्णा दूध योजना के तहत कक्षा एक से पांच तक 150 एमएल प्रतिदिन, कक्षा छह से आठ तक 200 एमएल प्रतिदिन बच्चों को दिया जाता है। जिले में करीब एक लाख १४ हजार २६ विद्यार्थियों को दूध दिया जाता था तथा इतने ही विद्यार्थियों को मिड डे मील दिया जा रहा है।
Updated on:
05 Apr 2019 03:07 pm
Published on:
05 Apr 2019 03:07 pm
