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यूपी के सोनभद्र में इस वजह से हो जाती है मरीजों की मौत, अनुप्रिया पटेल ने किया ये वादा

इलाज को 130 किलोमीटर जाना होता है, रास्ते में ही हो जाती है कितनी मौतें

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patient death lake of doctor and facility in hospital in mirzapur

यूपी के सोनभद्र में इस वजह से हो जाती है मरीजों की मौत, अनुप्रिया पटेल ने किया ये वादा

सोनभद्र. कभी एशिया की सबसे बड़ी बिजली परियोजना के रूप में ओबरा पावर स्टेशन की स्थापना की गई जो सूबे के अलावा दूसरे राज्यों को भी रोशन करने का काम किया। इसके अलावा क्षेत्र व परियोजना के लोगों के इलाज के लिए ओबरा परियोजना चिकित्सालय की भी स्थापना की गई। लेकिन एक लाख से ऊपर की आबादी वाले इस क्षेत्र में एक मात्र अस्पताल है, जो आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है।

कहने को तो परियोजना का अस्पताल है, लेकिन इलाज के लिए दुरूह क्षेत्र के आदिवासी व वनवासी ही ज्यादा संख्या में आते रहे हैं,जो इनके जीने और मरने का एक मात्र लाइलाज था वह भी दूर होता दिख रहा है।

इन्हीं सब मुद्दों को लेकर अभियंता संघ ओबरा-पिपरी क्षेत्र के क्षेत्रीय सचिव इं अदालत वर्मा व युवा बहुजन सेवा समिति के अध्यक्ष आनंद पटेल दयालु के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल से मुलाकात कर ओबरा तापीय परियोजना अस्पताल में चिकित्सकों की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। साथ ही उन्होंने अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों तथा पैरामेडिकल स्टॉफ की भारी कमी व अन्य सुविधाओं की कमी की वजह से आपातकाल में उत्पन्न होने वाले भयावह स्थिति से मांगपत्र के माध्यम से अवगत कराया।

मंत्री अनुप्रिया पटेल ने प्रतिनिधि मंडल द्वारा रखी गई मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर निगम मुख्यालय स्तर से समाधान करवाने का आश्वासन दिया। वर्मा ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को अवगत कराया कि, ओबरा नगर में तापीय परियोजना, निर्माणाधीन सी परियोजना, क्रषर व खनन उद्योग है। जहां हजारों लोग कार्यरत हैं, जहां दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। इस बीच यह एक मात्र अस्पताल है, जिसकी स्वास्थ्य सेवा लगभग ठप है। उक्त अस्पताल में डॉक्टर न होने से परियोजना कर्मियों सहित नगरवासियों को बहुत ही परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। चिकित्सकों की कमी के कारण जहां एक तरफ मरीजों को मामूली समस्या पर भी अन्यत्र के लिए रेफर कर दिया जाता है। वहीं अस्पताल में इमरजेंसी सेवा भी बंद कर दी गई है।

दयालू ने बताया कि, गम्भीर स्थिति होने पर लोगों को इलाज हेतु 130 किलोमीटर दूर वाराणसी रेफर कर दिया जाता है। जिससे कुछ मरीजों की रास्ते में ही मौत हो जाती है। वर्मा ने बताया कि, लगभग यहीं स्थिति उत्पादन निगम के बाकी अस्पतालों की भी हो गई है। इस सम्बन्ध में निगम प्रबंधन को विगत में कई बार अवगत कराया गया है। बावजूद इसके निगम प्रबंधन निरंकुश बना हुआ है। इसे लेकर बिजली कामगारों एवं आमजनों में निगम प्रबंधन के खिलाफ रोष व्याप्त है।

INPUT- जितेंद्र गुप्ता

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