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अनोखी शादी : जब एक ही मंडप में बाबा-पिता और भाई ने लिए फेरे, तब जाकर हुई पोती की शादी, अनूठी है वजह

Sonbhadra Unique Wedding सोनभद्र के दक्षिणांचल स्थित दुद्धी तहसील के दिघुल गांव में हुई एक शादी आजकल पूरे इनाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। जानकार ताज्जुब होगा कि, पोती की शादी करने के लिए बाबा-दादी, मां-पिता और भाई-भाभी को शादी करने पड़ी। तब जाकर वो कन्यादान कर सकें। नहीं तो समाज ने कन्यादान करने पर बैन लगा दिया था। वजह जानें

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अनोखी शादी : जब एक ही मंडप बाबा-पिता और भाई ने लिए फेरे, तब जाकर हुई पोती की शादी, अनूठी है वजह

अनोखी शादी : जब एक ही मंडप बाबा-पिता और भाई ने लिए फेरे, तब जाकर हुई पोती की शादी, अनूठी है वजह

एक अनोखी शादी। एक ही मंडप में दादा-दादी, मां-पिता और बेटी की शादी। सुनकर कुछ अजीब सा लगता है। पर सामाजिक कायदे कानून और बेटी की जिद आगे परिजनों को झुकना पड़ा। मामला कुछ ऐसा था कि इस परिवार में तीन पीढ़ियां सिर्फ लव मैरिज ही कर रही थी। अब जब पोती की शादी की बात चली तो मामला कन्यादान पर अटका गया। आखिर कौन करेगा कन्यादान। क्योंकि न तो दादा-दादी की शादी को सामाजिक मान्यता मिली और न ही मां-बाप का। तब हल निकाला गया कि, सभी पहले शादी करे तब कन्यादान। इस पर सब सहमत हो गए। और एक ही मंडप में दादा-दादी, मां-पिता संग बेटी ने एक साथ सात फेरे लिए।

सोनभद्र के दक्षिणांचल स्थित दुद्धी तहसील के दिघुल में यह शादी पूरे इनाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। दिलचस्प बात यह है कि इस शादी के पीछे एक बेटी की पहल और परिवार में कई पीढ़ियों से हो रहे प्रेम विवाह को सामाजिक मान्यता न मिलने के दंश को खत्म करने की जिद रही। दिघुल गांव के नंदकुमार की बेटी सपना की शादी 25 अप्रैल को तय थी। अब आड़े आ रहा था कन्यादान। सपना के बड़े भाई, माता-पिता से लेकर दादा-दादी तक ने प्रेम विवाह रचाया हुआ है। शादी में हिंदू रीति-रिवाज और उससे जुड़ी रस्म नहीं निभाई गई है। तो इस पेंच को बेटी सपना ने खत्म कर दिया। सब हंसी खुशी सामाजिक विधि विधान से शादी रचाने को तैयार हो गए।

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दादा-दादी ने लिए फेरे
सबसे पहले दादा राम प्रसाद और दादी सुभगिया देवी ने सात फेरे लिए। फिर सपना के माता-पिता और उसके बड़े भाई-भाभी ने शादी की रस्म निभाई। सबसे आखिर में जाकर सपना की शादी हुई। जिसका कन्यादान पिता नंद कुमार ने किया।

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बेटी ने तोड़ी परंपरा

ग्रामीण बताते हैं कि नंदकुमार के परिवार में प्रेम विवाह एक परंपरा सा बन गया था। इस कारण सामाजिक रिवाजों पर विश्वास करने वाले लोग उनसे दूरी बनाने लगे थे लेकिन उनके घर की एक बेटी की जिद ने न केवल सभी के गिले-शिकवे दूर कर दिए।