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रणथम्भौर दुर्ग में हुआ था राजस्थान के इतिहास का पहला जौहर

इतिहास के पन्नों को पलटा जाए तो रणथम्भौर दुर्ग का जौहर महारानी गंगा देवी का जौहर अमर है।

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jal johar

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सवाईमाधोपुर। चितौड़ की रानी पद्मावती के जौहर पर बनी फिल्म को लेकर भले ही बवाल मच रहा हो लेकिन इतिहास के पन्नों को पलटा जाए तो रणथम्भौर दुर्ग का जौहर महारानी गंगा देवी का जौहर अमर है। इसे कभी भुलाया नहीं जा सकता है। इतिहासकारों की माने तो रणथम्भौर दुर्ग में 1301 ईस्वी में पहला जल जौहर हुआ था। हम्मीर देव की पत्नी रानी रंगादेवी ने रणथम्भौर दुर्ग स्थित पद्मला तालाब में कूदकर जल जौहर किया था। इतिहासकार इसे राजस्थान पहला एवं एकमात्र जल जौहर भी मानते हैं। रानी रंगा देवी ने ये जौहर आक्रान्ता शासक अलाउद्दीन खिलजी द्वारा रणथम्भौर दुर्ग पर किए आक्रमण के दौरान किया था।

यह है इतिहास
इतिहासकारों का कहना है कि अलाउद्दीन खिलजी के गुजरात विजय के बाद वहां से लूटे गए धन को लेकर सेनानायकों में विद्रोह हो गया। जिसके चलते सेनानायक राव हम्मीर देव की शरण में आ गए। जिन्हें वापस लेने के लिए अलाउद्दीन खिलजी ने रणथम्भौर पर आक्रमण कर दिया। अभेद्य दुर्ग रणथम्भौर को आधीन करने में अलाउद्दीन खिलजी को 11 माह का वक्त लगा था। रणथम्भौर विकास समिति के अध्यक्ष व दुर्ग के इतिहासवेता गोकुलचंद गोयल ने बताया कि रणथम्भौर में हम्मीर की सेनाओं की पराजय होते देख इस दौरान रंगादेवी व 12 हजार वीरांगनाओं ने अपने मान सम्मान की रक्षा के लिए यह जौहर किया था।

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इतिहास के ग्रन्थों में भी उल्लेख
इतिहासविद् उपाध्याय का कहना है कि महाराव हम्मीर की मुख्य रानी रंगदेवी के नेतृत्व में किले की वीरांगनाओं ने वह अपूर्व जौहर किया। इसका उल्लेख इतिहास के कई ग्रंथों में मिलता है। (हम्मीर ऑफ रणथंभोर-हरविास सारस्वत पृ.44), जोधराकृत हम्मीररासो संपादक-श्यामसुंदर दास पृ. 62), (जिला गजेटियर सवाईमाधोपुर पृ. 32), सवाईमाधोपुर दिग्दर्शन सं. गजानंद डेरोलिया पृ.125) हम्मीर रासो में लिखा है कि जौहर के वक्त रणथम्भौर में रानियों ने शीस फूल, दामिनी, आड़, तांटक, हार, बाजूबंद, जोसन पौंची, पायजेब आदि आभूषण धारण किए थे। हम्मीर विषयक काव्य ग्रंथों में सुल्तान अलाउद्दीन द्वारा हम्मीर की पुत्री देवलदेह, नर्तकियों तथा सेविकाओं की मांग करने पर देवलदेह के उत्सर्ग की गाथा मिलती है, किन्तु इसका ऐतिहासिक संदर्भ नहीं मिलता। इतिहासकार ताऊ शोखावटी ने बताया कि उम्मीरदेव की पत्नी रंगादेवी उनकी सेविकाओं और अन्य रानियों के साथ जौहर किया था। इतिहासकारों के अनुसार यह राजस्थान का पहला जौहर था।

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यह कहते है इतिहासकार
इतिहास प्रभाशंकर उपाध्याय ने बताया कि जौहर यमग्रह ने बना हुआ शब्द है, यह यमग्रह से अपभ्रंश होकर जमग्रह बना फिर जौहर हुआ। रातपूताना में तीन जौहरों की गाथा है चित्तौडग़ढ़ रणथम्भौर दुर्ग एवं जालौर दुर्ग का जौहर। कहते है कि जालोर के किले में 1584 जमग्रह थे।