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मौसमी बीमारियाें के मरीज बढ़े… मगर ओपीडी में चिकित्सक नहीं

मौसम में बदलाव का असर अस्पताल की ओपीडी पर भी पड़ रहा है। इससे सामान्य अस्पताल की मेडिसिन ओपीडी में मौसमी बीमारियों के मरीजों का भार बढ़ गया है, लेकिन ओपीडी में चिकित्सकों की कई कुर्सियां खाली पड़ी रहती है।

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अलवर

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Umesh Sharma

Aug 25, 2024

अलवर.

मौसम में बदलाव का असर अस्पताल की ओपीडी पर भी पड़ रहा है। इससे सामान्य अस्पताल की मेडिसिन ओपीडी में मौसमी बीमारियों के मरीजों का भार बढ़ गया है, लेकिन ओपीडी में चिकित्सकों की कई कुर्सियां खाली पड़ी रहती है। यहां चिकित्सकों के कम बैठने के कारण मरीजों को चिकित्सा परामर्श के लिए 2-2 घंटे तक लाइन में लगना पड़ रहा है। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में इलाज के लिए आने पर पहले उन्हें दवा पर्ची के लिए कतार में लगना पड़ता है। इसके बाद चिकित्सा परामर्श, जांच व दवा के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों की सीट पर भी रेजिडेंट

अस्पताल के अधिकांश विभागों में विशेषज्ञों की सीट पर भी सीनियर व जूनियर रेजिडेंट चिकित्सक ही बैठे दिखाई देते हैं। ऐसे में लंबे इंतजार के बाद भी मरीजों को रेजिडेंट चिकित्सकों को दिखाकर ही संतुष्ट होना पड़ता है। हालांकि कई विशेषज्ञ चिकित्सक भी ओपीडी में मौजूद होते हैं, लेकिन मुख्य सीटों पर रेजिडेंट्स चिकित्सकों का ही कब्जा देखने को मिलता है।

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अधिकांश वार्डों में बेड भी फुल

मौसमी बीमारियों के कारण अस्पताल के अधिकांश वार्डों में बेड फुल हैं। इसके कारण आईपीडी के मरीजों को भर्ती के लिए भी इंतजार करना पड़ रहा है। हालात यह है चिकित्सक के परामर्श पर मरीजों को भर्ती कराने के लिए परिजनों को इधर-उधर भटकना पड़ता है। उन्हें खुद वार्डों में जाकर बेड की स्थिति पता करनी होती है। इसके बाद खाली बेड की मिलने के बाद मरीज को भर्ती किया जाता है। इस प्रक्रिया में काफी समय लगने के कारण गंभीर मरीज की स्थिति और भी खराब हो सकती है।