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Udaipur: भाई ने निभाया बड़े होने का फर्ज, छोटे भाई को किडनी देकर दिया नई जिंदगी का तोहफा, पत्नी बोली-परिवार बच गया

Elder Brother Donate Kidney: उदयपुर में बड़े भाई ने अपनी एक किडनी देकर छोटे भाई को नई जिंदगी दी। भीलवाड़ा निवासी युवराज का सफल किडनी ट्रांसप्लांट हुआ, जिसके बाद वह डायलिसिस से मुक्त होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं।
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Udaipur Kidney Transplant

जीबीएच जनरल हाॅस्पिटल में सफल ऑपरेशन के बाद का फोटो: पत्रिका

Kidney Transplant Successful Operation In JBH Hospital: बड़े भाई ने अपनी एक किडनी देकर छोटे भाई को न सिर्फ एक नई जिंदगी दी बल्कि रिश्तों की नई मिसाल बन गई है। उदयपुर के जीबीएच जनरल हॉस्पिटल में भीलवाड़ा निवासी 38 साल के युवराज का सफल किडनी ट्रांसप्लांट हुआ। पत्नी ममता और बड़े भाई दिलीप दोनों ने किडनी डोनर के रूप में जांच कराई पर बड़े भाई ने मुश्किल से परिवार को इसके लिए तैयार किया कि वे बड़े होने का फर्ज निभाएंगे। 6 घंटे के ऑपरेशन के बाद अब युवराज डायलिसिस से मुक्त होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं। दिलीप को 4 दिन बाद ही डिस्चार्ज कर दिया।

जानकारी के अनुसार भीलवाड़ा निवासी दो छोटे बच्चों के पिता युवराज को नवंबर 2025 में अचानक कमर में दर्द शुरू हुआ। शुरुआत में इसे सामान्य परेशानी समझा पर दर्द लगातार रहा तो जांच कराई। रिपोर्ट में दोनों गुर्दे गंभीर रूप से प्रभावित होने की जानकारी मिली। फिर शुरू हुआ अस्पतालों और शहरों का लंबा सफर।

कई विशेषज्ञों से परामर्श लिया अहमदाबाद में 15 दिन तक इलाज चला पर बीमारी बढ़ती गई। डायलिसिस भी विकल्प नहीं बचा। भीलवाड़ा में परिवार ने जीबीएच अमेरिकन हॉस्पिटल में नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. अनुराग जैन को रिपोर्ट दिखाई तो उन्होंने ट्रांसप्लांट की सलाह दी। इसके बाद जीबीएच जनरल हॉस्पिटल उदयपुर ने किडनी ट्रांसप्लांट की।

परिवार बच गया: ममता

पत्नी ममता भावुक होकर कहती हैं, 'जब हमें दोनों किडनी खराब होने का पता चला था तब हर तरफ डर और निराशा थी। बच्चों का चेहरा देखकर रातों की नींद उड़ जाती थी। आज पति स्वस्थ हैं और हमारा परिवार फिर से मुस्कुरा रहा है। सच कहूं तो ऐसा लग रहा है कि हमारा परिवार बच गया। बड़े भाई के त्याग और डॉक्टरों की मेहनत से हमें नई जिंदगी मिली है। इसके लिए हम पूरी टीम के जीवनभर आभारी रहेंगे।'

पहला ऑपरेशन, पूरी तरह सफल

जीबीएच जनरल हॉस्पिटल में यह पहला सफल किडनी ट्रांसप्लांट है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार करीब 6 घंटे तक चले इस जटिल ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत में लगातार सुधार देखा गया। ट्रांसप्लांट के बाद युवराज अब सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं और उन्हें डायलिसिस की जरूरत नहीं पड़ रही है।

ऑपरेशन में नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. मुकेश बडजात्या, डॉ. अनुराग जैन, डॉ. महेश देसाई, यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप शर्मा, डॉ. विवेक शर्मा, डॉ. कमलेश सिंह, डॉ. वरुण लड्ढा, निश्चेतना विभाग से डॉ. तरुण भटनागर, डॉ. राजेंद्र शर्मा, डॉ. अपेक्षा कच्छारा, डॉ. विकास शर्मा व टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।